गाजियाबाद। मसूरी थाना क्षेत्र की एक कॉलोनी में रविवार की रात 14 वर्षीय दसवीं की छात्रा ने घर में ही फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। उसके परिजनों का कहना है कि उसके साथ रविवार को दिन में उसके सहपाठी ने घर में घुसकर दुष्कर्म किया था। वह इससे आहत थी और गुमसुम हो गई थी। पुलिस ने केस दर्ज कर छात्र को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना की रिपोर्ट छात्रा के दादा ने दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि पोती रविवार को घर में अकेली थी। वह धौलाना क्षेत्र में अपने गांव में गए हुए थे। उनका बेटा सेना में है और ड्यूटी पर है। पोता काफी दिनों से बीमार है और उसका दिल्ली में उपचार चल रहा है। पुत्रवधू उसकी तीमारदारी में दिल्ली में ही रह रही है। दादा ने पुलिस को बताया कि वे जब शाम को लौटे तो देखा कि घर के बाहर 10-12 लोग मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि वे लोग अपने बेटे की तलाश में आए हैं।
उनका बेटा यहीं इसी घर में जाते हुए देखा गया है। छात्रा के दादा का कहना है कि वे लोग घर में घुस गए। इसके बाद पूरा घर खंगाला। उनका बेटा छत पर मिला। वे उसे साथ ले गए। पोती ने बताया कि वह उसकी क्लास में ही पढ़ता है और जबरन घर में घुसा था। इसके बाद से पोती गुमसुम थी। उसने खाना भी नहीं खाया था। उन्होंने जानकारी की तो पता चला कि वह किशोर उनकी पोती को पहले से ब्लैकमेल कर रहा है। उसे अकेला पाकर घर में घुसा और दुष्कर्म कर छत के रास्ते भागने की कोशिश में था।
एसीपी मसूरी निमिष पाटिल का कहना है कि मामले में दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट व आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेजा जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
साढ़े दस बजे सोई और डेढ़ बजे लटकी मिली
छात्रा के दादा का कहना है कि करीब साढ़े दस बजे वह पोती के कमरे में गए तो वह सोई हुई थी। देर रात करीब डेढ़ बजे आंधी आई तो मुम्टी का दरवाजा आवाज करने लगे। उसे वह बंद करने गए। नीचे आते हुए उन्होंने पोती के कमरे की लाइट जली देख अंदर जाकर देखा तो वह फंदे से लटकी मिली। इसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी।
छात्रा ने मां को हथेली पर कट मारने के भेजे थे फोटो
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार छात्रा ने किशोर के जाने के बाद चाकू से हथेली पर कट मारने के फोटो लेकर अपनी मां को भेजे थे। लेकिन उसकी मां ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अगर वह गंभीरता से लेकर इसकी सूचना अपने ससुर या अन्य किसी को दे देतीं तो छात्रा की जान बचाई जा सकती थी।