गाजियाबाद। बिजली के तारों को बदलने या उसे ठीक करने के लिए ऊर्जा निगम प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। इसके बाद भी जर्जर तार ठीक नहीं हो रहे हैं। हालांकि, ऊर्जा निगम के लाइनमैन अपनी जुगाड़ तकनीक के सहारे जूता और चप्पल तारों के बीच फंसा कर कुछ देर के लिए ही सही फॉल्ट से बचने का इंतजाम कर रहे हैं। ये तकनीक तेज हवा चलते ही फेल हो जाती है और आपस में टकराकर तारों में फॉल्ट आ जा रहा है। कुछ ऐसा ही नजारा कैला भट्ठा, संजय नगर सेक्टर-23, पुराना गाजियाबाद में भी देखने को मिला।
गर्मियों में बिजली की डिमांड बढ़ जाती है। लोड बढ़ने से फॉल्ट भी ज्यादा होते हैं, जिस कारण कॉलोनियों में कई-कई घंटे बिजली कटौती रहती है। हालांकि फॉल्ट को ठीक करने के लिए ऊर्जा निगम के पास पर्याप्त साधन है पर लाइनमैन जुगाड़ लगाकर इन फॉल्ट को ठीक करते हैं। खासकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा खराब है। शास्त्रीनगर स्थित रजापुर गांव में लाइनमैन ने बिजली के खंभों पर झूल रहे तारों के बीच चप्पल और लकड़ी लगा रखी है, ताकि हवा चलने पर तार आपस में न मिले। वहीं खंभों में लगे बिजली के बोर्ड भी जर्जर हो चुके हैं।
हर वक्त स्पार्किंग होती रहती है। इसकी शिकायत क्षेत्रवासी बिजेंद्र सिंह, अजीत व बंटी ने विभागीय अधिकारियों को भी दी पर उन्होंने इसे अनसुना कर दिया। वहीं कैला भट्ठा के पूर्व पार्षद जाकिर अली ने बताया कि कॉलोनी में लगे बिजली के खंभों में हुए फॉल्ट को ठीक करने के लिए जूता लगाया गया है। तेज धूप और बारिश में जूता कभी भी सड़ कर गिर सकता है, जिससे कभी भी हादसा होने की आशंका रहती है। उधर, ऊर्जा निगम के चीफ इंजीनियर नीरज स्वरूप का कहना है कि तारों के बीच चप्पल या जूता लगाना गलत है। शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।