गाजियाबाद। आदित्य वर्ल्ड सिटी निवासी अशोक श्रीवास्तव (62) की डेंगू से मौत हो गई। उनका उपचार निजी अस्पताल में चल रहा था। अस्पताल की रिपोर्ट में मौत की वजह डेंगू शाॅक और सेप्टिक सिंड्रोम बताई गई है। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल से रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही पता चलेगा की मौत की वजह डेंगू है या नहीं।
अशोक श्रीवास्तव मधुमेह के भी मरीज थे। बुखार होने पर तबीयत बिगड़ती जा रही थी। खून की उल्टी होने पर परिजन घबरा गए। उन्हें मणिपाल अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने उन्हें डेंगू शॉक सिंड्रोम बता भर्ती कर लिया। परिजनों का कहना है कि अस्पताल की ओर से ओर से उनकी डेंगू जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई। रविवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजन शव का अंतिम संस्कार करने पैतृक स्थान गोंडा ले गए। जिला मलेरिया अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा का कहना है कि डेंगू से मौत के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। मणिपाल अस्पताल की ओर से भी इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई है। मामले की जानकारी की जा रही है और अस्पताल प्रबंधन से रिपोर्ट मांगी गई है।
12 डेंगू मरीजों की हुई है पुष्टि
मलेरिया विभाग और सर्विलांस अधिकारी की तरफ से अभी तक सिर्फ 12 डेंगू मरीजों की पुष्टि हुई है। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि इस समय अस्पताल में डेंगू बुखार का कोई भी मरीज भर्ती नहीं है। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह हुई बरसात से जगह-जगह जलभराव हुआ है। अभी 15 दिन तक सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि ऐसे मौसम में डेंगू बुखार फैलने की आशंका रहती है।
रोजाना मिल रहे हैं 120 से 150 स्थानों पर डेंगू के लार्वा
मलेरिया विभाग के सर्वे में रोजाना 120 से 150 स्थानों पर डेंगू के लार्वा मिल रहे हैं। अपर जिला मलेरिया अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि अलग-अलग क्षेत्रों में डेंगू ब्रीड चेकर (डीबीसी) की टीमें सर्वे कर रही हैं। विजयनगर, पंचवटी, कविनगर, वसुंधरा, श्याम पार्क व श्यामपार्क एक्सटेंशन, राजबाग, वेव सिटी, हिंडन विहार, अटौर नंगला, नंदग्राम, आदर्श नगर, राजनगर एक्सटेंशन में कूलर, गमले और पक्षियों को पानी देने वाले बर्तनों के अलावा छत पर टूटे-फूटे बर्तनों में डेंगू का लार्वा मिल रहा है। उन्होंने बताया कि सभी स्थानों से लार्वा नष्ट कराने के साथ ही निर्देश दिया गया है कि दोबारा किसी स्थान पर जलभराव नहीं होने पाए। 15 दिन के बाद दोबारा जांच करने पर अगर लार्वा मिला तो संबंधित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।