एनआरएचएम घोटाले में फंसे यूपीएसआईसी में तैनात रहे जूनियर इंजीनियर की दो कारों को आरटीओ से रिलीज न कराने पर कोर्ट ने सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई। इससे पहले आरोपी ने अर्जी लगाकर कोर्ट से मांग की थी कि उसकी दो कारों को सड़क पर चलने और उनका उपयोग करने की अनुमति दी जाए।
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश स्माल स्केल इंडस्ट्रीज (यूपीएसआईसी) के पूर्व निदेशक अभय कुमार वाजपेयी समेत एनआरएचएम घोटाले के कई आरोपी कोर्ट में पेश हुए। आरोपी जूनियर इंजीनियर सुनील चौहान ने कोर्ट में अर्जी देकर बताया कि घोटाले में गिरफ्तारी के बाद उनके घर पर खड़ी दो कारों को सड़क पर चलने, उन्हें बेचने और
उनके किसी अन्य के नाम ट्रांसफर न किए जाने की बाबत सीबीआई ने आरटीओ को पत्र लिखा था। सीबीआई के आदेश के बाद ही उनकी दोनों कारें घर में ही खड़ी हुई हैं।आरोपी ने बताया कि अगस्त 2016 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी आज तक सीबीआई ने इस प्रतिबंध को समाप्त नहीं किया है।
ऐसे में उनकी कारें घर में ही खड़ी-खड़ी बेकार हो रही हैं। कई बार सीबीआई से उसने गुहार लगाई, मगर आरटीओ से प्रतिबंध नहीं हटवाया गया।सीबीआई विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने कोर्ट में मौजूद मामले के जांच अफसर अतरपाल सिंह को कड़ी फटकार लगाई।
न्यायाधीश का कहना था कि जब सुप्रीम कोर्ट से आरोपी को अगस्त 2016 में ही जमानत मिल चुकी है तो सीबीआई ने आरटीओ से उनकी कारों के उपयोग और प्रयोग पर लगवाया प्रतिबंध आखिर क्यों नहीं हटवाया।
कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए जांच अधिकारी ने तत्काल लिखित में न्यायाधीश को आश्वस्त किया कि वह जल्द ही आरोपी की कारों को आरटीओ के प्रतिबंधित आदेश से मुक्त कराकर उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर देंगे।
गवाह के भी कसे पेंच:
इससे पहले एनआरएचएम घोटाले के कई अन्य आरोपी भी कोर्ट में पेश हुए। एक मामले में गवाह सोमनाथ की गवाही होनी थी, मगर दोपहर तक वह नहीं आया। इस पर कोर्ट ने गवाह के खिलाफ 309 का नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। हालांकि कोर्ट नोटिस जारी करती उससे पूर्व ही दोपहर करीब एक बजे गवाह कोर्ट में पेश हो गया।