अब गांवों को ओडीएफ का दर्जा तभी मिलेगा जब वहां के बच्चे बताएंगे कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य खुले में शौच नहीं जाता है। अब गांवों में चल रहे स्वच्छता मुहिम को बच्चों के जरिए रफ्तार दी जाएगी।
डीपीआरओ वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि गांवों को ओडीएफ करने की मुहिम में बच्चों को जोड़ा जा रहा है। परिषदीय विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों से गांव की स्वच्छता के बारे में पूछा जाएगा। डीपीआरओ ने बताया कि बच्चों के जरिए ग्रामीणों पर निगरानी रखी जाएगी।
हालांकि स्वच्छता चैंपियन सुबह शाम गांव में गश्त करेंगे लेकिन बच्चों से भी पूछा जाएगा कि उनके घर से कौन-कौन खुले में शौच जाता है। इसके बाद उन लोगों पर विशेष नजर रखी जाएगी जिससेउन्हें खुले में शौच जाने से रोक सकें। परिषदीय विद्यालय और आंगनबाड़ी सेंटर पर आने वाले बच्चों को इस मुहिम से जोड़ा जाएगा।
बच्चे मुहिम से जुड़ेंगे तो वे अपने अभिभावकों के साथ ही और लोगों पर भी नजर रखेंगे। डीपीआरओ ने बताया कि गांवों को ओडीएफ करने के लिए लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है। बहुत से लोग अभी भी ऐसे हैं जो घर में शौचालय होते हुए बाहर जाते हैं।
ऐसे में बच्चों के जरिए जब यह मुहिम चलेगी तो उम्मीद जताई जा रही है कि प्रभावी होगी। खुले में शौच जाने वाले लोगों को जब बच्चे टोकेंगे तो यह असरकारी होगा।