पुलिस की विवेचनाएं कमजोर होती हैं, जिसका फायदा अभियुक्तों को मिलता है और वह बच जाते हैं। डीजीपी इससे नाराज हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी पुलिस प्रमुखों को आदेश जारी किया है कि सिर्फ मौखिक एविडेंस के आधार पर विवेचनाएं न करें। वैज्ञानिक पद्धति से एविडेंस कलेक्ट करें, ताकि अभियुक्तों को सजा दिलाई जा सके।
डीजीपी जावीद अहमद ने पत्र में लिखा है कि दोषपूर्ण विवेचना होने से अभियुक्तों को लाभ मिलता है, साथ ही पुलिस विभाग के खिलाफ लोगों की धारणा बनती है। खासकर संगीन अपराधों में विवेचना का स्तर उच्च कोटि का होना चाहिए, जिससे अभियुक्तों को कड़ी सजा दिलाने में मदद मिल सके।
अमूमन, पुलिस की विवेचना मौखिक साक्ष्यों पर आधारित रहती है। विवेचना में फिजिकल एविडेंस पर खास ध्यान नहीं दिया जाता। मौखिक साक्ष्यों पर आधारित विवेचना से कोर्ट में अभियुक्त का दोष सिद्ध कर पाना कठिन होता है, लिहाजा वैज्ञानिक पद्धति से साक्ष्य संकलन करें।
घटनास्थल पर फिजिकल एविडेंस पर खास ध्यान दें, खून, पसीना, थूक, लार, मल-मूत्र, फिंगर प्रिंट को सुबूत बनाएं। फोरेंसिक लैब में इनका परीक्षण कराएं। यह अपराधी को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
एविडेंस मजबूत होंगे तो अभियुक्तों को सजा मिलेगी। इससे पुलिस के प्रति लोगों की धारणा बदलेगी। एसएसपी केएस इमेनुएल ने बताया कि डीजीपी के निर्देशों का पालन कराया जा रहा है।