यशोदा अस्पताल में भर्ती घायल कांस्टेबल सुखबीर सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई है। मृतक के चचेरे भाई कविराज ने कविनगर थाने में आरोपी सिपाही उमेश यादव निवासी नंगला बुधू, वैधपुरा इटावा के खिलाफ हत्या और एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया है। आरोपी फरार है, एसएसपी ने उसे सस्पेंड कर दिया है और तीन टीमें उसकी तलाश में इटावा, फरीदाबाद और हरियाणा में दबिश दे रही हैं।
सुखबीर सिंह (32) पुत्र चरण सिंह निवासी कुसवा थाना अवागढ़ जिला एटा थे। वह पिछले तीन साल से पत्नी और बच्चों के साथ आगरा के मऊ रोड जल विहार में रह रहे थे। बृहस्पतिवार रात करीब ढाई बजे गाजियाबाद पुलिस ने एटा में रहने वाले परिवार के लोगों को मौत की जानकारी दी।
सूचना के बाद सुखबीर के चाचा बबलू गांव के चार लोगों के साथ यशोदा अस्पताल पहुंचे। एफआईआर में लिखाया है कि लोहा मंडी में चौकी के पास पीसीआर-37 पर तैनात सुखबीर और लोहा मंडी चौकी पर तैनात उमेश के बीच किसी बात पर विवाद हुआ था, जिसके बाद उमेश ने 9 एमएम की सर्विस पिस्टल से सुखबीर के पेट में गोली मार दी थी।
गंभीर हालत में उन्हें पहले सर्वोदय और बाद यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। सुखबीर के चचेरे भाई कविराज ने बताया कि उनके भाई ने अस्पताल में बयान दिया था कि वह एससी है तो क्या उमेश उसे जान से मार देगा।
एसएचओ कविनगर हेमंत राय ने बताया कि डॉक्टरों के मुताबिक ऑपरेशन के दौरान सुखबीर के शरीर की 70 से प्रतिशत से अधिक नसों ने काम करना बंद कर दिया था, जबकि उनका बीपी और शुगर भी काफी कम हो गया था।
उन्होंने बताया कि गोली सुखबीर पेट में आगे से लगी और डॉक्टरों ने उनकी कमर के नीचे वाले हिस्से से बाहर निकाली। उन्होंने बताया कि एसएसपी को रिपोर्ट भेजी गई है, जिसमें सरकारी असलहे (9 एमएम की पिस्टल) के दुरुपयोग की बात कही गई है। दूसरी तरफ, विभाग में यह भी चर्चा है कि एसएसपी सिपाहियों को दिए गए पिस्टल को लेकर समीक्षा करा सकते हैं।
आंखों में आंसू और बूढ़े कंधों पर इकलौते बेटे की अर्थी
आंखों में आंसू, कांपते लब और बूढ़े कंधों पर इकलौते जवान बेटे की अर्थी। बीएसएफ से सेवानिवृत्त सुखबीर के पिता चरण सिंह (65) के लिए इससे बड़ा गम क्या होगा।
पोस्टमार्टम हाउस पर जारों कतार रो रहे चरण सिंह समझ नहीं पा रहे थे कि अपना गम छिपाकर परिवार और मासूम पोते-पोतियों को कैसे ढांढस बंधाएं। आंसू छिपाने के लिए कई बार उन्होंने अपने चेहरे को हाथों से ढंका।
बेटे की मौत की खबर सुनकर शुक्रवार तड़के चार बजे गाजियाबाद पहुंचे चरण सिंह ने बताया कि वह एटा के कुसवा गांव में ही बेटे का अंतिम संस्कार करेंगे। उन्होंने बताया कि सुखबीर 2006 बैच का सिपाही था और पिछले 2011 से गाजियाबाद में तैनात था।
सुखबीर दो सप्ताह पहले ही गांव में आया था और बच्चों के लिए आलू का एक बोरा लेकर गया था। 11 साल पहले सुखबीर की कुराई गांव कासगंज की रहने वाली आशा से शादी हुई थी। उसके अतुल (8), निधी (5) और जतिन (3) बच्चे हैं।
तीनों बच्चे भी मां आशा देवी के साथ गाजियाबाद में पिता केशव को लेने पहुंचे। पोस्टमार्टम हाउस पर बैठे सुखबीर के बच्चों ने कहा कि उनके पापा बहुत अच्छे थे, वह जब भी घर आते थे तो उनके लिए काजू, सोहन पापड़ी और कोल्ड ड्रिंक लेकर आते थे। अब उन्हें यह सब कौन लाकर देगा। दूसरी तरफ, परिजन देर शाम सुखबीर के शव को लेकर एटा के लिए रवाना हो गए।
परिजनों का आरोप- अवैध उगाही का विरोध करने पर हुई हत्या
सुखवीर के परिजनों का आरोप है कि अवैध उगाही का विरोध करने पर हत्या की गई है। आरोपी अवैध उगाही करता है, जिसका सुखबीर विरोध करता था। बुधवार रात सुखबीर ने लोहा मंडी स्थित एक खोखे पर अवैध रूप से बिक रहे शराब और गांजा का विरोध किया तो बेचने वाले युवक ने उससे कहा कि वह इसके लिए ठेकेदार उमेश को पैसे देता है।
इसी से नाराज सुखबीर ने बृहस्पतिवार शाम चौकी पर पहुंचकर उमेश से उगाही का विरोध किया तो वह उसे लेकर बाहर बने खोखे पर ले गया और शराब पिलाकर उसके पेट में गोली मार दी। परिजनों का यह भी आरोप है कि पिछले दो माह से दोनों में जातिसूचक शब्द कहने लेकर भी झगड़ा चल रहा था। पुलिस इन बिंदुओं पर भी जांच कर रही है।
बुलंदशहर में भी सिपाही ने मारी थीं गोलियां
बुलंदशहर जिले में भी 22 अगस्त को एक सिपाही ने अपने एक साथी की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जबकि गोली लगने से दो पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके अलावा सिपाही ने बाद में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।