इंदिरापुरम स्थित नहर रोड पर ऑटो को टक्कर मारने वाले ऑडी चालक को पुलिस 48 घंटे बाद भी नहीं तलाश सकी है। हालांकि पुलिस जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि कार मालिक असिस्टेंट प्रोफेसर वसुंधरा के ऑलिव काउंटी में रह रहे थे। मोबाइल लोकेशन की जांच में सामने आया है कि घटना के समय वह अस्पताल से ड्यूटी कर घर लौट रहे थे।
सीओ इंदिरापुरम अनिल यादव ने बताया कि जांच में सामने आया है कि कार मालिक असिस्टेंट प्रोफेसर मनीष रावत वसुंधरा की ऑलिव काउंटी सोसायटी में पत्नी और दो बेटों के साथ रहते हैं। मनीष ने जून 2016 में ही सफदरजंग अस्पताल ज्वाइन किया था।
इससे पहले वह राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कार्यरत थे। मनीष के एक करीबी ने बताया है कि घटना की रात से ही मनीष का नंबर बंद आ रहा है। जबकि अगले दिन से उनका परिवार भी घर को ताला लगाकर चला गया है। दिल्ली सरिता विहार के जिस पते पर मनीष की ऑडी कार रजिस्टर्ड है, वहां मनीष कुछ माह पहले तक रहते थे। उस घर को भी ताला लगा मिला है।
- मोबाइल लोकेशन से पता चला, घटना के समय कार में थे मनीष
सीओ इंदिरापुरम ने बताया कि मोबाइल लोकेशन से यह साफ हो गया है कि घटना के समय मनीष नहर रोड पर ही थे। घटना के बाद वह दिल्ली गाजीपुर की ओर चले गए। रात करीब पौने एक बजे ही उन्होंने घर में आखिरी कॉल की थी। इसके बाद से उनका मोबाइल नंबर बंद है।
सीओ ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि मनीष खुद ही कार चलाते थे। ऐसे में यह शक और गहरा गया है कि दुर्घटना को मनीष ने ही अंजाम दिया है। हालांकि मनीष के साथी असिस्टेंट प्रोफेसर केबी शंकर ने बताया कि मनीष शांत स्वाभाव का है।
परिजनों को सौंपा गया शव
शुक्रवार देर रात दिल्ली की ओर से आ रही तेज रफ्तार ऑडी कार ने ऑटो को टक्कर मारते हुए 100 मीटर तक घसीट दिया था। इस दौरान ऑटो चालक संजीव, सॉफ्टवेयर इंजीनियर रिंकू यादव, कानपुर के रहने वाले विशाल और यजुवेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई थी।
पुलिस के अनुसार शनिवार देर रात सभी शवों को उनके परिजनों के सुपर्द कर दिया। जिसके बाद देर रात परिजन रिंकू, विशाल और यजुवेंद्र के शवों को लेकर कानपुर रवाना हो गए। उधर, खोड़ा निवासी ऑटो चालक के शव का दिल्ली के गाजीपुर स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। सभी के परिजन सदमे में हैं।