बुलंदशहर गैंगरेप पीड़ित मां-बेटी को सदमे से उबारने के लिए जिला प्रशासन ने तीन काउंसलर नियुक्त किए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से नियुक्त यह तीनों काउंसलर करीब तीन माह तक मां-बेटी की काउंसलिंग करेंगे। राष्ट्रीय महिला आयोग के काउंसलर की टीम भी बीच-बीच में आकर दोनों से बातचीत करेगी।
पीड़ित परिवार को दो फ्लैट और मुआवजे की घोषणा के बाद अब प्रशासन का लक्ष्य पीड़ित मां-बेटी के जीवन को पहले की तरह सामान्य करना है। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के आशा ज्योति सेंटर की दो और चाइल्ड लाइन संस्था से एक महिला काउंसलर को काउंसलिंग का जिम्मा सौंपा है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी महेश कंडवाल ने बताया कि तीनों काउंसलर पीड़िताओं के साथ 24 घंटे तब तक रहेंगी जब तक दोनों की स्थिति सामान्य न हो जाए। काउंसलरों के अनुसार घटना के बाद से दोनों को गहरा मानसिक आघात लगा है, जिससे उबरने में समय लगेगा।
कोशिश की जा रही है कि दोनों से घटना के विषय में बातचीत न की जाए। खासतौर पर किशोरी से घटना के बारे में कोई भी बात नहीं पूछी जाए। प्रशासन का लक्ष्य जल्द से जल्द किशोरी के जीवन को सामान्य करना है।
स्कूल शुरू होने के बाद वह पुरानी बातों को दिमाग से निकाल सकेगी। काउंसलरों ने बताया कि बीते बृहस्पतिवार को अपनी मार्शल आर्ट क्लास की सहेलियों से मिलकर किशोरी के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई थी।
मुआवजे से ज्यादा जरूरी आरोपियों की सजा : पिता
गैंगरेप पीड़ित किशोरी के पिता का कहना है कि मुआवजे की घोषणा भले कर दी गई हो लेकिन इससे ज्यादा जरूरी आरोपियों को सजा होना है। पिता ने बताया कि उन्हें डीएम ने बुलाकर फ्लैट और मुआवजे की जानकारी दी है।
उन्होंने डीएम से यही मांग की है कि इस सबसे पहले सभी आरोपियों को पकड़कर फांसी पर लटकाया जाए तभी उन्हें असल में इंसाफ मिलेगा। पीड़ित पिता ने बताया कि यह बात वह पहले दिन से कह रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उन्हें समाचार पत्रों से पता चला है कि चौथा आरोपी भी पकड़ा गया है, अगर ऐसा है तो वह खुश हैं और पुलिस प्रशासन के प्रयासों से संतुष्ट हैं। सभी आरोपी सलाखों के पीछे होने चाहिए।
पीड़ित परिवार के घर के आसपास तैनात रही पुलिस
डीएम निधि केसरवानी के निर्देशों के बाद घर के आसपास स्थायी रूप से दो पीसीआर तैनात की गई हैं। साथ ही घर में परिवार के लोगों के अलावा सभी का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। शुक्रवार को कुछ मीडियाकर्मियों को भी पुलिस ने लौटा दिया।
काउंसलरों का कहना है पीड़िताओं के जीवन को सामान्य करने के लिए उन्हें मीडिया से दूर रहना होगा। एसओ खोड़ा अवेधश यादव ने बताया कि परिवार की सहमति के बिना किसी को भी मिलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
विधायक ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
स्थानीय विधायक अमरपाल शर्मा ने पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। विधायक अमरपाल शर्मा ने बताया कि घटना से पीड़ित परिवार को आघात पहुंचा है। ऐसे में बच्ची और परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आर्थिक मदद जरूरी है।
मानवाधिकार आयोग से मामले की शिकायत
गाजियाबाद। इस मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष से की गई है। विजय नगर निवासी सुदीप साहू ने मानवाधिकार आयोग को मामले की शिकायत करते हुए प्रदेश सरकार से रिपोर्ट लेकर उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
आयोग अध्यक्ष से शिकायत में 100 नंबर की बदहाल स्थिति का जिक्र करते हुए कहा गया है कि प्रदेश में आम आदमी बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। ऐसे में आयोग अध्यक्ष इस संबंध में हस्तक्षेप करें। उन्होंने कहा कि आयोग के हस्तक्षेप से प्रभाव होगा और पीड़ित मां-बेटी व परिवार को सुरक्षा और दोषियों को सजा मिल सकेगी।