कहते हैं कि मनुष्य में जीने की इच्छा सबसे अधिक होती है। इंसान हर हाल में जीना चाहता है लेकिन वर्तमान परिस्थितियां ऐसी बनती जा रही हैं, जहां काफी लोगों को जीना भी बेमानी लगने लगा है। लोग आत्महत्या की ओर बढ़ हो रहे हैं। आत्महत्या करने वाले में सबसे अधिक संख्या युवाओं की है।
एनआरसीबी के आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दशक में देश में 131666 लोगों ने आत्महत्या की है। इस रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या करने वालों में 65 फीसदी 15 से 24 वर्ष के युवा हैं। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार भी आत्महत्या की प्रवृति महामारी का रूप लेती जा रही है।
गरीबी और प्रेम प्रसंग के मामलों में आत्महत्या करने वालों की संख्या अधिक है। मनोचिकित्सक डॉ. संजीव त्यागी ने बताया कि सर्वे के अनुसार एजुकेशनल हब और महानगरों में सबसे ज्यादा युवा आत्महत्या कर रहे हैं।
इसका कारण है कि इन महानगरों में दूर-दूर से युवक कामयाबी के सपने लेकर आते हैं और जब इन शहरों में स्टेटस मेंटेन नहीं कर पाते और सपने टूटते दिखते हैं तो वह डिप्रेशन में आकर आत्महत्या कर लेते हैं।
गाजियाबाद में सुसाइड के 35 फीसदी मामले बढ़े
संवेदना सोसाइटी फार मेंटल हेल्थ की ओर से शुक्रवार को वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे की पूर्व संध्या पर प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इस दौरान चिकित्सकों ने मोमबत्ती जलाकर आशा की किरण ढूंढने और जीवन की लौ जलाए रखने की अपील की।
मनोचिकित्सक डॉ. हेमिका अग्रवाल ने बताया कि एनआरसीबी के आंकड़ों के अनुसार 2013 के मुकाबले 2014 में आत्महत्या में गाजियाबाद में 35.6 फीसदी की वृद्धि हुई है। डा. आर चंद्रा ने बताया कि विश्व में आठ लाख लोग प्रतिवर्ष आत्महत्या करते हैं, जिसका प्रमुख कारण है समस्या को शुरुआती दौर में नजरअंदाज करना।
डॉ. संजीव त्यागी ने बताया कि इस बार डब्ल्यूएचओ की थीम है ‘कनेक्ट, कम्यूनिकेट एंड केयर’। उन्होंने बताया कि अवसाद या तनाव से पीड़ित व्यक्ति या सुसाइडल टेंडेंसी के व्यक्ति के समझाने से अधिक उसको समझने की कोशिश करें और आत्महत्या करने का क्या कारण हैं, उसको जानने की कोशिश करें। प्रेस कांफ्रेंस में मुख्य रूप से संस्था के अध्यक्ष डॉ. एचपी त्यागी और संवेदना त्यागी मौजूद रहीं।