स्टांप शुल्क के ब्याज का भुगतान नहीं करने पर प्रशासन ने मंगलवार दोपहर को वसुंधरा सेक्टर-6 स्थित श्रीकृष्णा अपार्टमेंट को सील कर दिया। सीलिंग से अपार्टमेंट में रह रहे 120 परिवार सोसायटी में ही कैद हो गए। वहीं, सोसायटी के जो लोग काम से बाहर निकले थे, वो अंदर नहीं जा सके।
शाम को रेजिडेंट्स के दफ्तरों से घर लौटने पर हंगामा शुरू हो गया। प्रशासन की कार्रवाई को तानाशाही बताते हुए रेजिडेंट्स ने जमकर हंगामा किया और मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। करीब दो घंटे तक हंगामा चलता रहा।
बाद में डीएम के आदेश पर पहुंचे अमीन ने अपार्टमेंट की सील खोली, जिसके बाद हंगामा शांत हुआ।मंगलवार दोपहर तहसीलदार कार्यालय से अमीन जितेंद्र सिंह स्थानीय पुलिस के साथ श्रीकृष्णा अपार्टमेंट पहुंचे और गेट बंद कर सोसायटी सील कर दी। रेजिडेंट्स को जानकारी दी गई कि स्टांप शुल्क का ब्याज बकाया होने के चलते सीलिंग की कार्रवाई की गई है।
आरोप है कि प्रशासन की ओर से कर्मचारियों ने पांच लाख रुपये ब्याज की मांग की, जिस पर लोग भड़क गए। लोगों का गुस्सा देखते हुए अपार्टमेंट को सील कर कर्मचारी मौके से चले गए। श्रीकृष्णा सहकारी आवास समिति के अध्यक्ष वीके भटनागर ने बताया कि प्रशासन की ओर से बगैर नोटिस दिए कार्रवाई की गई है।
सोसायटी के अंदर लोग कैद हैं और ऑफिस से लौटने वाले रेजिडेंट्स गेट के बाहर खड़े हैं। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी से संपर्क करने कोशिश की गई, लेकिन उनके शहर से बाहर होने से बात नहीं हो सकी। शाम छह बजे जब दफ्तर से लोग घर पहुंचने शुरू हुए तो गेट पर सील लगे होने के चलते अंदर नहीं जा सके।
इस पर रेजिडेंट्स का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। गुस्साए रेजिडेंट्स ने कुछ देर बाद मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया। इसी दौरान कुछ रेजिडेंट्स ने टायर लाकर आग लगा दी। मौके पर पुलिस पहुंची, लेकिन रेजिडेंट्स को समझाने में नाकाम रही।समिति के अध्यक्ष ने बताया डीएम के आदेश पर अमीन ने रात आठ बजे आकर सील खोली।
उसके बाद लोग सोसायटी के अंदर आ सके। इस दौरान राजीव जैन, निर्मला तिवारी, संजय सिंह, रेखा त्यागी, सुनीता त्यागी, वीरेंद्र सिंह, कमल सिंह, राजीव पंत मौजूद रहे।
कोर्ट के आदेश पर जमा कराया था स्टांप शुल्क
वर्ष 2012 में ढाई करोड़ रुपये जमा कर सोसायटी की रजिस्ट्री कराई गई थी, लेकिन चार वर्ष बाद वर्ष 2016 में एडिशनल कमिश्नर स्टांप की ओर से नोटिस आया, जिसमें कहा गया कि स्टांप ड्यूटी कम लगी है, 14 लाख रुपये और जमा करने होंगे। इस पर श्रीकृष्णा सहकारी आवास समिति ने मेरठ कोर्ट में याचिका दाखिल की।
कोर्ट के आदेश पर रेजिडेंट्स ने 14 लाख रुपये का बकाया स्टांप शुल्क जमा कर दिया, लेकिन अब करीब 10 लाख रुपये ब्याज बकाया बताया जा रहा है, जिसका नोटिस दिए बगैर ही सोसायटी सील करने का आरोप लगाया। समिति का कहना है कि नोटिस में ब्याज की रकम जमा कराने का जिक्र नहीं था।
अधिकारी बोले
तसीलदार मनोज कुमार सिंह ने बताया कि सोसायटी पर करीब 24 लाख रुपये का स्टांप शुल्क बकाया है। इसमें से 14 लाख रुपए लोग जमा करा चुके हैं, जबकि ब्याज की 9 लाख 30 हजार 52 रुपए की रकम बकाया है। इसके लिए 17 जून को नोटिस जारी किया गया था। जून में ही समिति की ओर से 14 लाख रुपये जमा करा दिए गए, लेकिन ब्याज की रकम जमा नहीं करा गई। इसके चलते ही सोसायटी सील की गई।
मानवाधिकार आयोग में करेंगे शिकायत
रेजिडेंट्स ने कहा कि प्रशासन की तानाशाही के खिलाफ हाईकोर्ट और मानवाधिकार आयोग में शिकायत करेंगे। ब्याज की रकम जमा कराने का नोटिस दिए बगैर सीलिंग की कार्रवाई नहीं की जा सकती है।