एंटी करप्शन विजिलेंस की स्पेशल टीम ने शुक्रवार की रात साहिबाबाद से त्रिपुरा-मणिपुर कैडर के आईपीएस अफसर जॉयदीप नायक को ओडीशा में हुए भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया है। जॉयदीप नायक को सीजीएम कोर्ट में पेश कर विजिलेंस टीम ने चार दिन की ट्रांजिट रिमांड पर लिया है।
नायक को शुक्रवार रात करीब साढ़े 10 बजे मोहन नगर स्थित हर्षा कंपाउंड से गिरफ्तार किया गया। भ्रष्टाचार के आरोप में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद बीते एक महीने से वह फरार थे। 1991 बैच के आईपीएस अफसर जॉयदीप नायक को 2011 में डेपुटेशन पर ओडिशा भेजा गया था।
वह अगस्त 2012 से 31 दिसंबर 2015 तक ह्यूमन राइट प्रोटेक्शन सेल के इनचार्ज थे। इस दौरान उन पर एसी/एसटी विद्यार्थियों और सेल्फ हेल्प ग्रुप की कंप्यूटर शिक्षा के लिए मिले 88 लाख रुपये बगैर टेंडर लिए कटक की एक कंप्यूटर कंपनी को कांट्रेक्ट देने का आरोप है।
डेपुटेशन पर दूसरे अधिकारी की तैनाती के बाद भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ। विभागीय ऑडिट में भी भ्रष्टाचार की पुष्टि होने पर रिपोर्ट दर्ज की गई। इसी साल जनवरी में जॉयदीप त्रिपुरा लौट गए।
रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस विभाग के एडिश्नल एसपी बसंता कुमार प्रधान, स्टेनो प्रचेता कुमार मिश्रा, कंप्यूटर कंपनी के संचालक आशुतोष मिश्रा, जीएम चंदीचरण पटनायक और प्रिंटिंग प्रेस संचालक ममता राउत को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। गत छह जुलाई को त्रिपुरा सरकार जॉयदीप नायक को सस्पेंड कर चुकी है।
विजिलेंस की स्पेशल टीम के सीओ एम राधाकृष्णन ने बताया कि जॉयदीप नायक को ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया है। 26 जुलाई तक उन्हें कटक में विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किया जाना है। गत 22 जून से उनका कोई पता नहीं था। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पैर की सर्जरी के बाद उसी दिन उन्हें डिस्चार्ज किया गया था।