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सौ बीघा जमीन की रंजिश में हो चुकीं दस हत्याएं

Wed, 31 Aug 2016 12:26 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
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AK 47 - फोटो : DEMO PIC
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100 बीघा जमीन के लिए 1984 से अब तक ब्रजपाल तेवतिया व सुरेश दीवान पक्षों में दस से अधिक हत्याएं हो चुकी हैं। दादा-परदादा के जमाने से चली आ रही रंजिश भी ब्रजपाल पर हमले मेें मुख्य कारण रही। दोनों पक्षों में नौ हत्याएं होने के बाद समझौता भी हो गया था। फिर पार्षद चुनाव में ब्रजपाल को सपोर्ट देने से मनीष के पिता सुरेश दीवान के इनकार करने के बाद उसकी भी हत्या हो गई।
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ब्रजपाल पर हमले के आरोपी मनोज के पिता के रिश्तेदार की महरौली गांव में सौ बीघा जमीन थी। रिश्तेदार का कोई वारिस न होने पर उसकी सेवा करने पर मनोज के पिता को भूमि पर कब्जा मिल गया था। वहीं, गांव के ही धर्मपाल समेत दूसरे पक्ष ने भी इसी भूमि पर हक जताया था।

इसे लेकर 1984 में चार लोगों की हत्या की गई थी जिसमें मनोज के पिता, मनीष (मुख्य आरोपी) के पिता सुरेश दीवान आदि पर धर्मपाल पक्ष के लोगों की हत्या का आरोप लगाकर नामजद किया गया था। सेशन कोर्ट में मनोज और मनीष के पिता को जेल भी हो गई थी। वर्ष 1987 में मनोज-मनीष पक्ष के दो लोगों की हत्या हो गई थी।
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इसके बाद 1997 में एक बार फिर इसी पक्ष के तीन और लोगों की हत्या हो गई थी। इस दौरान दोनों पक्षों के कई लोग जेल चले गए थे। खूनी रंजिश को रोकने के लिए में गांव के लोगों के बीच पंचायत के बाद समझौता हुआ और हाईकोर्ट से मनीष के पिता सुरेश दीवान को जमानत मिल गई।

ब्रजपाल ने पार्षद चुनाव के लिए मांगा था सपोर्ट
वर्ष 1999 में ब्रजपाल ने क्षेत्र से पार्षद चुनाव लड़ा था। उन्होंने इसके लिए सुरेश दीवान से सपोर्ट मांगा था। सुरेश ने ब्रजपाल को सपोर्ट देने से साफ इनकार कर दिया था। इसी वर्ष सुरेश की हत्या हो गई। इसमें ब्रजपाल समेत अन्य लोग नामजद थे। बाद में हुई पुलिस जांच में फाइनल रिपोर्ट में उनका नाम आरोपी में हटा दिया गया।

जेल में हसनपुरिया के संपर्क में आया था सुरेश
जेल में बंद सुरेश दीवान कुख्यात गैंगस्टर रहे राकेश हसनपुरिया के संपर्क में आ गया। उसे 100 बीघा भूमि में हिस्सा देने की बात हुई थी।

छह माह पहले हुआ विवाद भी बना वजह
लगभग छह महीने पहले मनीष और दूसरे पक्ष में खेत की मेढ़ लगाने को लेकर विवाद हो गया था। इस दौरान धर्मपाल पक्ष के लोगों ने पिछली हत्याओं का उसे ताना दिया था। इसके बाद से मनीष और मनोज ने ब्रजपाल तेवतिया को रास्ते से हटाने की ठान ली थी।
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