एलआईयू अधिकारियों की टीम ने फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाने की कोशिश कर रहे दो बांग्लादेशी युवकों को गिरफ्तार किया है। इनसे फर्जी आईडी पर खरीदे गए दो मोबाइल, गाजियाबाद से बने निवास प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, पास बुकें और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।
पकड़े गए आरोपी खालिद हुसैन पुत्र मोनिर हुसैन निवासी चोटो किना चौक, पोस्ट बागनबाड़ी, जिला चांदपुर बांग्लादेश और सागर खान पुत्र मकसूद खान निवासी सोना खाली मोरलगंज जिला बगरहट, बांग्लादेश हैं।
दोनों आरोपी अपने तीसरे साथी सूबो रहमान के साथ 10 माह पहले बांग्लादेश से बिना पासपोर्ट और वीजा के यहां आए थे। त्रिपुरा बार्डर से भारत की सीमा में कोलकाता में प्रवेश किया था। इसके बाद तीनों कोलकाता से ट्रेन में दिल्ली और फिर गाजियाबाद आए।
यहां तीनों इंदिरापुरम के खोड़ा मकनपुर इलाके की गली नंबर एक में किराए के मकान में रह रहे थे। तीनों नोएडा की एक निजी कंपनी में काम कर रहे थे। इसी बीच उन्हें इब्राहिम नाम का एक युवक मिला।
तीनों युवकों ने इब्राहिम को बताया कि वह दुबई जाना चाहते हैं, इसके लिए उन्हें भारतीय दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी। इब्राहिम ने खोड़ा मकनपुर के पते पर तीनों विदेशी युवकों के फर्जी पहचान पत्र, पैन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक में अकाउंट और राशन कार्ड तैयार करवाए।
खालिद और सागर ने इब्राहिम से पासपोर्ट बनवाने की बात कही तो उसने दोनों से इसके बदले 21 हजार रुपये लिए। इब्राहिम ने शनिवार सुबह दोनों को पासपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए एलआईयू ऑफिस भेज दिया।
वेरिफिकेशन के दौरान एलआईयू एसआई जल सिंह को दोनों युवकों की बोलचाल से शक हुआ तो उन्होंने पुलिस अफसरों को सूचना दी। अधिकारियों ने दोनों युवकों से सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने बांग्लादेश से भारत आने की बात की जानकारी दी।
इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर सिहानी गेट पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। सीओ एलआईयू अलका ने बताया कि दोनों युवकों की बोलचाल संदिग्ध लगी थी। दोनों के मोबाइल चेक किए गए तो दोनों ने अनेकों बार बांग्लादेश के नंबरों पर कॉल्स की हुईं थीं।
पुलिस की लापरवाही से बने फर्जी दस्तावेज
खोड़ा और इंदिरापुरम पुलिस की लापरवाही के कारण ही तीनों युवक भारतीय दस्तावेज तैयार करवा पाए। पुलिस अगर दस्तावेजों की सही तरीके से वेरिफिकेशन करती तो विदेशी युवक फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार नहीं करवा पाते। तहसील में दस्तावेज कैसे तैयार कर लिए गए, यह भी जांच का विषय है। पुलिस विभाग और प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है।
पकड़े गए दोनों आरोपियों से पुलिस पूछताछ कर रही है कि उन्होंने भारतीय दस्तावेज कहां से और किसकी सहायता से तैयार करवाए हैं। पुलिस दस्तावेजों की जांच कर रही है। बिना आईडी के दस्तावेज तैयार करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - मनीष मिश्र, सीओ सेकेंड गाजियाबाद
सुरक्षा व्यवस्था को खतरा, फिर भी अलर्ट नहीं पुलिस
हजारों बांग्लादेशियों के लिए आरामदायक पनाहगाह बन चुके गाजियाबाद से उन्हें वापस बांग्लादेश भेजने के दावे सिर्फ हवाई हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा होने के बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
दरअसल, पुलिस बांग्लादेशियों को वापस भेजने की सिरदर्दी से बचना चाहती है। हजारों रुपये और वक्त खर्च होता है। भेजने की प्रक्रिया के झंझट झेलने पड़ते हैं, सो अलग। नतीजतन, बांग्लादेशियों ने यहां अपने अड्डे बना लिया हैं।
उन्हें वापस भेजना डेढ़ी खीर होता जा रहा है। बांग्लादेशियों को वापस भेजने की प्रक्रिया केतहत इन्हें गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया जाता। इस बीच पुलिस कोर्ट में एक्सट्राडिशन की कार्रवाई के लिए अप्लाई करती है।
पुलिस को साबित करना पड़ता है कि पकड़ा गया शख्स बांग्लादेशी है। एलआईयू से रिपोर्ट जाती है। और भी कई विभागीय माथापच्चियां हैं। लिहाजा इस प्रक्रिया में कई महीने लग जाते हैं। तब तक बांग्लादेशी जेल में रहता है।
एक्सट्राडिशन मिलने के बाद बांग्लादेशियों की तादाद के हिसाब से पुलिसकर्मी (मसलन एक के साथ दो पुलिसकर्मी) इन्हें बांग्ला बॉर्डर तक छोड़कर आते हैं। इस दौरान हजारों रुपये का खर्चा होता। ये पुलिसवालों को वहन करना पड़ता है।
हालांकि बाद में एक प्रक्रिया केतहत यह कम-ज्यादा मिल जाता है। लेकिन इसमें काफी सिरदर्दी होती है और पुलिस इससे बचना चाहती है। लिहाजा वह बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी में लापरवाही बरतती है।
खुफिया विभाग के पास बांग्लादेशियों की संख्या का पुख्ता आंकड़ा तो नहीं है, लेकिन इनकी तादाद हजारों में है। इसके अलावा लंबे समय से यहां जमे होने के कारण उन्होंने यहां के राशन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड आदि बनवा लिए हैं। ऐसे में उन्हें पकड़ना और साबित करना परेशानी का सबब बनता है।
कौन कसे बांग्लादेशियों पर नकेल
ट्रांस हिंडन क्षेत्र में बांग्लादेशियों की आमद बदस्तूर जारी है। दिल्ली से सटी कुछ कालोनियां इनका प्रमुख ठिकाना हैं। किराए पर मकान लेेकर वह चोरी-चुपके गुजर-बसर कर रहे हैं। पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) इस मामले में सिर्फ कागजी गुडवर्क कर आला अफसराें को खुश करने में लगे हैं।
बांग्लादेशियों के लिए हिंडनपार क्षेत्र की कुछ कालोनियां आरामदायक पनाहगाह साबित हो रही हैं। दिल्ली की तरफ से बांग्लादेशी परिवारों का आना निरंतर जारी है। खुफिया विभाग के सूत्रों का कहना है कि शहीद नगर, जवाहर पार्क, राजीव कालोनी, ग्राम पसौंडा, विक्रम एंक्लेव, छाबड़ा कालोनी, महाराजपुर, ग्राम भोपुरा, फरुखनगर, पंचशील कालोनी, अर्थला, बन्नापीर कालोनी, बार्डर, नसबंदी कालोनी, खस्सी कालोनी, शालीमार गार्डन, कड़कड़ मॉडल के अलावा वसुंधरा, वैशाली, कौशांबी और इंदिरापुरम की झुग्गी-झोपड़ियों में बांग्लादेशी पनाह लिए हुए हैं।
एलआईयू की टीम द्वारा अक्सर इन कालोनियों में छापा मारकर बांग्लादेशी युवकों व महिलाओं की गिरफ्तारी की जा चुकी है। सूत्रों का कहना है कि परिवार के लोग जहां छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों में दिहाड़ी मजदूरी का कार्य कर रहे हैं।
वहीं महिलाएं घरों में झाडू-पौंछा के अलावा कबाड़ बीनने के काम में लगी हैं। खुफिया विभाग के पास बांग्लादेशियों की संख्या का पुख्ता आंकड़ा नहीं है। दिल्ली के निकट यूपी बार्डर पर कड़ी चौकसी के बगैर इनकी घुसपैठ को रोकना मुमकिन नहीं।
कुछ भवन मालिकों ने पैसों के लालच में बांग्लादेशियों को ऊंचे दामों में किराए पर कमरे उपलब्ध करा रखे हैं। खुफिया तंत्र का कहना है कि जनता की तरफ से उन्हें इस मामले में अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता। अलबत्ता बांग्लादेशियों की दृष्टि से यह क्षेत्र कम संवेदनशील नहीं है।