मुंबई इंडियंस और सनराइजर्स हैदराबाद के मैच पर सट्टा लगाते पांच युवकों को सोमवार रात वृंदावन ग्रीन अपार्टमेंट से क्राइम ब्रांच ने धर दबोचा। गिरफ्तार युवकों में दो मुख्य बुकी और तीन छोटे बुकी हैं, जो फोन पर पंटरों से सट्टा लगवाते थे। सट्टेबाजों के पास से एक लैपटॉप, 15 मोबाइल, एक एलईडी और 12 हजार रुपये बरामद हुए हैं।
गिरोह के साथ दिल्ली-एनसीआर में सट्टा लगाने वाले 500 से ज्यादा लोग जुड़े हैं। पुलिस सभी की तलाश कर रही है।एसपी सिटी आकाश गौतम ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर क्राइम ब्रांच प्रभारी एससी बेलवाल ने टीम के साथ साहिबाबाद के वृंदावन ग्रीन अपार्टमेंट के फ्लैट में छापेमारी की। टीम ने सट्टा लगाते पांच लोगों को दबोचा।
सभी मोबाइल के जरिए सोमवार को चल रहे मुबंई इंडियंस और सनराइजर्स हैदराबाद के मैच पर सट्टा लगा रहे थे। गिरफ्तार युवकों में दिलशाद कालोनी दिल्ली निवासी पारस नारंग और विपिन मुख्य बुकी हैं। दोनों मंगला नामक बुकी के संपर्क में रहते हैं और रेट तय करते थे।
दोनों ने अशोक निवासी नोएडा सेक्टर 20, अंशुल जैन निवासी बड़ौत और अमरीश निवासी शामली को सैलरी पर रखा था। पारस और विपिन द्वारा बताए रेटों को ये तीनों सट्टा लगाने वाले लोगों (पंटरों) तक फोन के माध्यम से पहुंचाते थे। पंटरों से एडवांस में सट्टे की रकम नकद या ऑनलाइन ली जाती थी।
सट्टा खत्म होते ही रकम वापस अकाउंट में या पेटीएम से ट्रांसफर करवाई जाती थी। डिलीवरी ब्वॉय भी रकम पहुंचाकर आते थे।
टीवी पर 45 सेकेंड देरी से प्रसारण का उठाते थे फायदा
एसपी सिटी ने बताया कि मैदान पर सट्टेबाज गिरोह का एक सदस्य रहता है, जो मोबाइल से पल-पल की खबर गिरोह को देता था। टीवी पर होने वाला लाइव प्रसारण करीब 40-45 सेकेंड देरी से होता है, जिसका फायदा उठाते हुए बुकी रेट बदल देते थे।
ओवर की शुरुआती दो बॉल फेंके जाने के बाद उसका प्रसारण टीवी पर हो पाता है। अगर इन बॉल पर विकेट गिरता या छक्का लगता तो बुकी तुरंत अपने फायदे के लिए रेट घटा-बढ़ा देते हैं।
दुबई, मुंबई और हैदराबाद के बुकीज से जुड़े हो सकते हैं तार
क्राइम ब्रांच प्रभारी एससी बेलवाल ने बताया कि पारस और विपिन छोटे बुकी हैं, जो फोन और लीज लाइन के जरिए बड़े बुकीज के संपर्क में रहते थे। बड़े बुकीज से मिले रेट पर अपना कमीशन काटकर वह नीचे के लोगों को बताते थे। हर डील पर उनका कमीशन बंधा था।
क्राइम ब्रांच के अनुसार दोनों के तार दुबई, मुंबई और हैदराबाद से जुड़े हो सकते हैं। उनके मोबाइल और लैपटॉप की जांच की जा रही है। जल्द ही बड़े सट्टा नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।
कोड वर्ड से चलता था सट्टे का नेटवर्क
एसपी सिटी के अनुसार सट्टा खिलाने के लिए पारस ने मोबाइल पर एक अलग से लाइन ली हुई थी। लाइन एक कंप्यूटराइज्ड वॉयस सिस्टम होता है। इसके लिए एक नंबर जारी होता है।
इस पर कॉल लगाते ही उस दिन के मैच के टॉस से लेकर 10 ओवर के रन, विकेट, प्रत्येक ओवर के रन आदि के सट्टे के रेट कोड वर्ड के जरिए पता लगते थे। सभी इंटेक्स कंपनी के मोबाइल का उपयोग करते थे, जिनमें पूरी बात रिकॉर्ड रहती थी। मुख्य बुकी पारस ने कोड भाषा की ट्रेनिंग भी ली है।
इसी का फायदा उठाकर वह मोटा कमीशन खाता था। कुछ दिन पहले तक पारस घर के पास जनरल स्टोर चलाता था। रुपयों के लालच मे वह सट्टेबाज बन गया।