लाइन बिछा रही कंपनी की लापरवाही से एक बार फिर मजदूर की जान चली गई। आईजीएल की लाइन फटने से हुआ हादसा पहली बार नहीं हुआ है। जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां से चंद कदमों की दूरी पर आईजीएल की लाइन का बोर्ड लगा था। अगर खुदाई करवा रही कंपनी ने पहले ही आईजीएल से एनओसी ली होती तो हादसा न होता।
इससे पहले 5 नवंबर 2015 के दिन राजेंद्र नगर में खुदाई के दौरान आईजीएल लाइन फटने से एक मजदूर बुरी तरह झुलस गया था। आईजीएल के क्षेत्रीय प्रबंधक हेमंत सिंह ने बताया कि आईजीएल की ओर से लगातार एसएमएस के माध्यम से लोगों से अपील की जाती है कि खुदाई से पहले आईजीएल को जानकारी दें।
जिससे किसी भी प्रकार के हादसे को टाला जा सके। अवैध खुदाई करने वाली कंपनियों के खिलाफ एफआईआर भी करवाई जाती है। मगर इसके बावजूद सरकार एजेंसियों के लिए काम करने वाले ठेकेदार ही बिना एनओसी के काम करते हैं।
- 15 मिनट तक आंखों के आगे छा गया अंधेरा
घटना के दौरान मृतक सुभाष के साथ ही काम कर रहे अन्य मजदूरों ने बताया कि कुदाल जैसे ही आईजीएल की लाइन पर लगा तेज धमाका हुआ। धमाका होते ही आंखों के आगे अंधेरा छा गया तो वे दूर भागे।
इस दौरान गड्ढे के अंदर मिट्टी की ढांग ढह गई। जिसमें सुभाष दब गया और उसकी मौत हो गई। करीब 15 मिनट तक सभी मजदूरों की आंखों के आगे अंधेरा छा गया। हालांकि मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल की गाड़ियों ने मजदूरों को पास के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां उनकी हालत में सुधार आया। जबकि सुभाष को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
5 नवंबर 2015- राजेंद्र नगर में पीएनजी लाइन में ब्लास्ट से एक मजदूर झुलसा
12 जून 2015- वसुंधरा सेक्टर-1 में पीएनजी लाइन फटने से हड़कंप, टला हादसा
27 जनवरी 2015- वैशाली सेक्टर 6 में पीएनजी लाइन फटी, दो मजदूर झुलसे