‘प्रियांशी की मौत आत्महत्या नहीं है। एक तरह से उसे मारा गया है। शिक्षा माफियाओं ने ऐसे हालात पैदा किए कि लाडली बेटी की जान चली गई। मेरी बेटी तो चली गई, मगर अब किसी बेटी के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए।
आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए। मुझे मेरी बेटी की मौत का इंसाफ चाहिए, राजनीति नहीं।’ यह कहना है प्रियांशी के पिता रतन सिंह तोमर का। अमर उजाला से हुई बातचीत में रतन सिंह तोमर का कहना था कि वह पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई से संतुष्ट है।
पुलिस ने इस मामले में त्वरित एक्शन लिया है। बस अब जरूरत है उन दो फरार मैडम को गिरफ्तार किए जाने की, जोकि उसकी बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार हैं। वह अपनी बेटी की मौत पर किसी प्रकार की राजनीति नहीं चाहते।
वह चाहते हैं तो सिर्फ इतना की शिक्षा माफियाओं को जल्द से जल्द सजा मिले। उन्होंने मीडिया से भी अनुरोध किया कि अगर कोई नेता या एनजीओ उनकी बेटी के नाम पर कोई धरना-प्रदर्शन करता है तो एक बार यह जरूर देख लिया जाए कि उस धरने प्रदर्शन में वह शामिल हैं या नहीं। वह अगर किसी धरने प्रदर्शन में शामिल नहीं हैं तो बेटी की मौत पर राजनीति करने वाले लोगों की बात को मीडिया अनसुना कर दे।
गंगा में प्रवाहित की गई प्रियांशी की अस्थियां
फीस की उधारी, पिता की लाचारी और कालेज में बेइज्जती से विचलित होने पर मौत को गले लगाने वाली प्रियांशी की अस्थियां शुक्रवार को गमगीन माहौल में गंगा में प्रवाहित कर दी गईं। पिता रतन सिंह तोमर और उनके कुछ रिश्तेदार शुक्रवार सुबह अस्थियां लेकर ब्रजघाट की ओर रवाना हुए, जहां उन्होंने गंगा में अस्थियों को प्रवाहित कर दिया।
गमगीन रहा माहौल, लगा रहा लोगों का तांता:
प्रियांशी की मौत के बाद से ही सेवा नगर में गम, गुस्से और गुबार का माहौल है। इस घटना को लेकर जहां हर कोई हैरान है, वहीं आरोपी टीचरों के खिलाफ उनके जहन में गुस्सा भी है। रानी तोमर और उसके तीन छोटे बच्चों की आंखों में प्रियांशी को याद करके रह-रह कर आंसू उमड़ पड़ते हैं।
उनका रोना देखकर मोहल्ले वालों के भी आंसू नहीं थम रहे थे। विभिन्न दलों के नेता और कुछ एनजीओ के पदाधिकारी भी प्रियांशी के घर पहुंचे और पीड़ित परिजनों को सांत्वना दी।
डीएसपी स्कूल की रद्द होगी मान्यता
घूकना की गली नंबर-8 स्थित डीएसपी स्कूल की मान्यता रद्द किए जाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। प्रियांशी मौत प्रकरण में जांच के बाद बीएसए ने इस स्कूल की मान्यता रद्द करने की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट एडी बेसिक को भेज दी है।
बेसिक शिक्षा विभाग की जांच टीम शुक्रवार को सुबह आठ बजे ही डीएसपी स्कूल पहुंच गई थी। स्कूल पर ताला लगा होने से जांच टीम के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से पूछताछ की।
पूछताछ में सामने आया कि विद्यालय इंग्लिश मीडियम में भी चलाया जा रहा था। यहां तक कि आठवीं कक्षा तक की मान्यता वाले इस स्कूल में कक्षा 12 तक की क्लासें संचालित की जाती थीं।
जांच अधिकारी टीम में शामिल खंड शिक्षा अधिकारी इंदिरा चौहान और नीलम तोमर ने बताया कि वे लोग स्थानीय लोगों की मदद से स्कूल संचालक के घर तक उनका पक्ष जानने पहुंचे, मगर घर पर स्कूल संचालक की बेटियां मिलीं।
इसके बाद संचालक का फोन नंबर मिलाया गया वह भी स्विच ऑफ मिला। बीएसए डा. प्रवेश यादव ने बताया कि जांच टीम के बाद वह स्वयं भी मामले की जांच करने मौके पर पहुंचे थे। स्कूल में जो बच्चे पढ़ रहे हैं, उनके अभिभावकों से मिली जानकारी के मुताबिक ही रिपोर्ट तैयार की गई है।
जांच में निकलीं इन खामियों ने मान्यता रद्द करने का दिया आधार
- स्कूल की मान्यता कक्षा एक से आठ तक की है, जबकि स्कूल नर्सरी से बारहवीं तक चल रहा था।
- विद्यालय परिसर में अवैध तरीके से किताबें-कॉपी बेचने की भी पुष्टि हुई है।
- स्कूल संचालक मानक से अधिक फीस वसूल रहे थे।
- स्कूल प्रबंधक ने नहीं रखा अपना पक्ष, रहे फरार।
- मान्यता केवल हिंदी मीडियम की थी जबकि इंग्लिश मीडियम की चल रही थी क्लास।
स्कूल की दूसरी ब्रांच पर भी मान्यता खत्म होने की लटकी तलवार
इंद्रगढ़ी स्थित इसी स्कूल की दूसरी ब्रांच पर भी मान्यता रद्द होने की तलवार लटक गई है। डीआईओएस राज सिंह यादव ने बताया कि उस विद्यालय की भी जांच कराई जाएगी। दरअसल विद्यालय की मान्यता माध्यमिक शिक्षा परिषद से हाई स्कूल तक की है। यदि दूसरी ब्रांच में भी अवैध तरीके से इंटर तक की क्लास चलती हुई पाई गई, तो वहां के विद्यालय की भी मान्यता रद्द की जाएगी।
खंगाली जाएगी स्कूलों की कुंडली
डीआईओएस ने बताया कि स्कूल की एक ब्रांच की मान्यता पर अन्य कई ब्रांच खोलने वाले संचालकों के सूची तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि यूपी बोर्ड के साथ ही सीबीएसई के कई स्कूलों की ऐसी शिकायत है। जो एक ही मान्यता पर कई ब्रांच चला रहे हैं। शिकायत की जांच करा कर ऐसे स्कूलों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।