मोहल्ला विश्वकर्मा बस्ती में रविवार सुबह ठेकेदार प्रेमलाल (38) ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर कुंडे से लटककर खुदकुशी कर ली। वह मध्यप्रदेश के जिला छतरपुर के गांव पन्नानगर के रहने वाले थे।
प्रेमलाल पुत्र डेढ़वा, पत्नी मंजू, बेटियों आंचल, आरती और पूजा के साथ विश्वकर्मा बस्ती भूपेंद्रपुरी गली नंबर-तीन स्थित एक मकान में किराए पर रहते थे। बेटी आरती के मुताबिक, उसकी मां मंजू मुरादनगर में एक प्राइवेट फैक्ट्री में नौकरी करती हैं।
वह सुबह करीब साढ़े छह बजे ड्यूटी पर गई थीं। सुबह आठ बजे उसके पिता किसी से फोन पर बात कर रहे थे। वह काफी तनाव में थे। फोन पर बातें करने के बाद उन्होंने फोन जमीन पर पटका और कमरे में जाकर भीतर से कुंडी लगा ली।
आरती ने बताया कि वह पिता से कुंडी खोलने की गुहार लगाती रही, लेकिन उन्होंने नहीं खोली। शोर शराबा सुनकर मोहल्ले के लोग भी वहां पहुंच गए। इस बीच ठेकेदार की पत्नी भी घर आ गई। काफी मशक्कत के बाद लोगों ने दरवाजा खोला तो प्रेमपाल का शव फंदे पर लटका था।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतारा। कोतवाली प्रभारी ब्रिजेश शर्मा ने बताया कि इस संबंध में कोई तहरीर नहीं मिली है। प्रथम दृष्टया मामला आर्थिक तंगी से आत्महत्या का प्रतीत होता है।
लेबर बना रहे थे पेमेंट करने का दबाव
मोदीनगर। प्रेमलाल सिविल कार्यों की छोटी मोटी ठेकेदारी करके परिवार चला रहे थे। बड़ी बेटी आंचल की तीन माह पूर्व ही पिलखुवा से शादी हुई है। दो बेटियों की आर्थिक तंगी की वजह से पढ़ाई बीच में ही छुड़वानी पड़ी।
बेटी आरती की मानें तो उसके पिता जिस व्यक्ति से फोन पर वार्ता कर रहे थे, उससे गुहार लगा रहे थे। कह रहे थे कि सोमवार को कुछ भुगतान आना है, इसलिए उसे एक दिन की मोहलत दी जाए। वह भुगतान कर देगा, मगर वह व्यक्ति इसके लिए तैयार नहीं हुआ।
इससे आहत पिता ने आत्महत्या की। बेटी का कहना है कि अगर उसके पिता को एक दिन की मोहलत के लिए कह दिया होता तो वह यह कदम नहीं उठाते। प्रेमलाल की पत्नी मंजू ने बताया कि प्रेमलाल ने जिन लोगों के यहां सिविल का काम किया, वहां से उन्हें भुगतान नहीं मिला, जबकि उनके पास काम करने वाली लेबर उन पर भुगतान के लिए बराबर दबाव बना रही थी। जिससे उसके पति पिछले काफी समय से तनाव में थे। उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते ही उसे नौकरी करनी पड़ी।