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बेटी को फ्लैट में बंद कर ऑफिस गए पैरेंट्स, लगी आग, पड़ोसियों ने बचाया

Tue, 10 Jan 2017 12:36 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /साहिबाबाद
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आग - फोटो : अमर उजाला
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 शक्तिखंड-1 के एक फ्लैट में शॉर्ट सर्किट से अचानक आग लग गई। इस दौरान छह साल की बच्ची घर पर अकेली थी। बच्ची के चिल्लाने की आवाज सुनकर पड़ोसियों ने खिड़की की ग्रिल काट कर उसे करीब 10 मिनट में बाहर निकाला। फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों ने करीब एक घंटे में आग पर काबू पाया।  
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शक्तिखंड-1 के फ्लैट संख्या 357 बी में संतोष कुमार पत्नी अंजू और बेटी वैष्णवी (6) के साथ रहते हैं। संतोष फिजियोथैरेपिस्ट हैं और अंजू नोएडा की एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, जबकि वैष्णवी मॉडर्न स्कूल में दूसरी कक्षा की छात्रा है।

सोमवार को वैष्णवी के स्कूल की छुट्टी होने के कारण संतोष और अंजू सुबह करीब नौ बजे उसे फ्लैट में बंद कर ऑफिस गए थे। सुबह करीब 11 बजे वैष्णवी वॉशरूम की ओर गई तो वॉशिंग मशीन में आग लगी हुई थी। धुआं उठता देख वह ड्राइंग रूम की ओर भागी और दरवाजा खोलने का प्रयास किया, लेकिन दरवाजा बाहर से बंद था।
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इसके बाद उसने खिड़की खोल कर पड़ोसियों को आवाज लगाई। पड़ोसियों ने तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी, साथ ही खिड़की का शीशा तोड़ा और ग्रिल काट कर वैष्णवी को बाहर निकाला। करीब 10 मिनट बाद पहुंचीं फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों ने आग बुझाई। आग में वॉशिंग मशीन, गीजर, फ्रीज समेत घर में रखा हजारों का माल जलकर राख हो गया। 

इस संबंध में एफएसओ अजय शर्मा ने बताया कि पानी गर्म करने वाली इमरसन रॉड ऑन छूट गई थी, जिसके अधिक गर्म होने पर उसमें शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे निकली चिंगारी से पास पड़ी अन्य चीजों में आग लग गई।       

पद्मावत और नीलम की सूझबूझ ने बचाई वैष्णवी की जान      
वैष्णवी की आवाज सुनते ही पड़ोस में रहने वाले होटल के अकाउंटेंट पद्मावत और महिला नीलम पांडेय बाहर निकले। दोनों ने तुरंत फ्लैट का दरवाजा तोड़ने की कोशिश शुरू कर दी, लेकिन जब दरवाजा नहीं टूटा तो उन्होंने साथ ही लगी खिड़की का शीशा तोड़ा और लोहे की ब्लेड से उसकी ग्रिल काट कर बच्ची को बाहर निकाल लिया।

इस दौरान घर में काफी धुआं भर गया था। अगर बच्ची कुछ देर और अंदर रुकती तो धुएं से उसकी जान जा सकती थी। सीओ इंदिरापुरम ने बच्ची को बाहर निकालने वाले दोनों पड़ोसियों की सराहना की है।       

पुलिस बोली, माता-पिता की लापरवाही      
सीओ इंदिरापुरम अनिल यादव ने बताया कि माता-पिता बच्ची को अकेला घर पर छोड़ कर दरवाजा बंद कर काम पर चले गए थे। ऐसे में उनकी लापरवाही है। घटना के बाद से बच्ची बेहद घबराई हुई है। पुलिस के अनुसार कुछ माह पहले भी संतोष के फ्लैट में आग लग गई थी, तब भी काफी नुकसान हुआ था।  
  
पैरेंट्स ने पड़ोसियों को कहा-शुक्रिया
आग लगने के बाद करीब साढ़े 11 बजे पड़ोसियों ने माता पिता को फोन कर घर में आग लगने की जानकारी दी। जानकारी मिलते ही दोनों घबरा गए और आनन फानन में घर के लिए दौड़े। करीब पौने एक बजे दोनों घर पहुंचे।

बेटी को सकुशल देखकर उन्होंने राहत की सांस ली। उन्होंने कहा कि घर में आग कैसे लगी इसकी कोई जानकारी नहीं है। बेटी को बचाने के लिए उन्होंने पड़ोसियों का धन्यवाद दिया। 

 काश हर पड़ोसी ऐसी ही मिसाल पेश करे
महानगरों की भागमभाग भरी जिंदगी और फ्लैट कल्चर के बढ़ने से लोगों का आपसी जुड़ाव कम होता जा रहा है। विभिन्न परेशानियों और सहयोग के लिए फ्लैटों के निवासियों के बीच सामाजिक सहभागिता जरूरी है।

शक्तिखंड में हुई घटना में बच्ची को बचाने के लिए पड़ोसियों ने जो भूमिका निभाई है, वह काबिले तारीफ है। हमें अपने पड़ोसियों का इसी तरह ध्यान रखना चाहिए।

साथ ही यह घटना उन पैरेंट्स के लिए सबक है, जो बच्चों को कमरे में अकेला बंद करके बाजार या दफ्तर चले जाते हैं। किसी हालत में भी बच्चों को कमरे में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।  - डा. जेएल रैना, वरिष्ठ समाजशास्त्री 
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