क्लर्क अमित सिंह की मौत के मामले में परिजनों ने हत्या का शक जताते हुए कविनगर थाने में तहरीर दी है, जिसमें दोस्त पर संदेह जताया गया है।
थाने पहुंचे परिजनों ने बताया कि अमित शनिवार सुबह नौ बजे किसी का फोन आने के बाद घर पर पत्नी मोनिका को यह कहकर निकला था कि वह अभी 15 मिनट में वापस आ रहा है। वह स्कूटी से निकाला था।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस को शनिवार सुबह घटना स्थल पर अमित की स्कूटी नहीं मिली, लेकिन देर शाम घटना स्थल से थोड़ी दूरी पर ही पुलिस को स्कूटी मिल गई। परिजनों ने जब घटना स्थल पर पहुंचकर लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि अमित के साथ दो लोग और थे।
परिजनों ने बताया कि अमित को जो कार शादी में मिली थी, वह कार उसने साढे़ छह लाख रुपये में बेच दी थी और साढे़ चार लाख रुपये में उसी कंपनी की हूबहू वही कार खरीदी थी। कार बेचकर जो दो लाख रुपये बचे थे, वह उसने अपने दोस्त को दे दिए थे।
परिजनों का कहना है कि पुलिस अमित को कॉल करने वाले की कॉल डिटेल्स निकाले। जहां अमित की स्कूटी मिली थी, उसके सामने एक मकान में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, उसकी फुटेज की जांच करे।
उन्हें शक है कि अमित की हत्या की गई है और इसके पीछे उसके किसी दोस्त का ही हाथ है। कविनगर एसएचओ ने बताया कि कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही है और लोगों से पूछताछ कर जांच की जा रही
है। बता दें कि अमित सिंह (22) पुत्र हंसराज सी-134 चिरंजीव विहार में परिवार के साथ रहते थे। वह गुलावठी के बहुपुर के मूल निवासी थे। परिवार में उनकी मां मंजू और पत्नी मोनिका हैं। अमित को छह माह पहले वाणिज्य कर विभाग में क्लर्क की नौकरी मिली थी।
यह नौकरी उन्हें दो साल पहले हुई उनके दादा राजेंद्र सिंह चौधरी की डेंगू से मौत के बाद मिली थी। बीस साल पहले अमित के पिता हंसराज की भी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। अमित परिवार में इकलौते थे।
तीन माह पहले ही उनकी इकला मसूरी की रहने वाली मोनिका से शादी हुई थी। अमित शनिवार सुबह नौ बजे घर से कचहरी स्थित वाणिज्य कर विभाग के लिए गए थे, तभी महरौली फाटक के पास हापुड़ से गाजियाबाद आने वाली ट्रेन की चपेट में आ गए थे।