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ट्रैक पर खेलते समय ट्रेन से कटकर भाई बहन की मौत

Fri, 12 May 2017 11:42 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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स्पेशल ट्रेन - फोटो : file photo
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कड़कड़ मॉडल गांव के पास स्थित रेलवे ट्रैक पर खेल रहे भाई बहन की शुक्रवार सुबह ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। साथ में खेल रहे दो और बच्चों ने परिजनों को हादसे में बारे में बताया। पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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 हरदोई के गांव बुझवा निवासी राम महेश कड़कड़ माडल गांव में किराए के मकान में पत्नी और पांच बच्चों के साथ रहते हैं। वह साइट-4 की एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। राम महेश की पत्नी मलना देवी ने बताया कि शुक्रवार सुबह साढ़े सात बजे वह बेटे सुधीर (12) और बेटी हिमांशी (10) को पानी भरने पास के नल पर भेज रही थीं।

लेकिन वह काम से बचने के लिए खेलने रेलवे ट्रैक की ओर निकल गए। करीब आठ बजे पड़ोस के दो बच्चे उनके घर पहुंचे और सुधीर और हिमांशी के ट्रेन से कटने की सूचना दी। इसके बाद पति राम महेश रेलवे ट्रैक पर पहुंचे तो सुधीर और हिमांशी के शव देख उनके होश उड़ गए।
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इसी बीच लोगों की सूचना पर पुलिस पहुंची और दोनों बच्चों को शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एएसपी अनूप सिंह ने बताया कि हादसे के बाद शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। घटना की जांच की जा रही है।       

ट्रैक किनारे घर लिया तो टूट पड़ा दुखों का पहाड़
मलना देवी ने रोते हुए बताया कि पहले वह गांव के मंगल बाजार के पास किराए के मकान में रहते थे। एक सप्ताह पहले ही उन्होंने रेलवे ट्रैक से महज 50 मीटर की दूरी पर कमरा लिया था। उन्होंने अपने बच्चों को रेलवे ट्रैक के किनारे जाने से मना किया था। इसके बावजूद दोनों चले गए। नया कमरा लेने के बाद ही उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

दोनों भाई बहन में था गहरा लगाव
सुधीर और हिमांशी पांच भाई-बहन थे। भाई-बहनों में सबसे बड़ी ममता, सुधीर, हिमांशी, अंजू व सबसे छोटा सुदेश है। सुधीर पांचवीं कक्षा और हिमांशी तीसरी कक्षा की छात्रा थी। दोनों गांव के एक स्कूल में पढ़ते थे। सुधीर और हिमांशी ज्यादातर एक एक दूसरे के साथ रहते और खेलते थे।       

आसपास के घरों में सुबह नहीं जले चूल्हे      
दोनों बच्चों की मौत से गांव में मातम पसर गया है। वहीं मां मलना देवी व पिता राम महेश का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना से पड़ोस में किसी के घर सुबह और दोपहर चूल्हा नहीं जला। पड़ोसियों का कहना है कि उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा है कि अब दोनों नहीं रहे। उन्हें लगता है कि खेलने गए हैं। थोड़ी देर में वापस आ जाएंगे।       

एक साल में पांच लोगों की हो चुकी है मौत      
करीब एक साल में गांव के पांच लोगों की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। गांव के पास रेलवे ट्रैक के किनारे सुरक्षा के लिए रेलिंग नहीं लगाई गई है। वहीं रेलवे ट्रैक से महज दस मीटर की दूरी पर मकान बने हुए हैं। ऐसे में गांव के बच्चे खेलते हुए रेलवे ट्रैक पर पहुंच जाते हैं।

हर पांच से 10 मिनट के अंतराल से ट्रेनें गुजरती हैं। गांव के लोगों का कहना है कि वह हर समय अपने बच्चों पर निगाह नहीं रख सकते। सुरक्षा के लिए रेलिंग होती तो आज बच्चों की जान नहीं जाती।
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