एनजीटी की फटकार के बावजूद निगम अफसरों ने दो साल में तालाबों को बचाने और सौंदर्यीकरण पर काम नहीं किया। निगम के आंकड़े बता रहे हैं कि अफसरों ने एनजीटी के आदेशों का भी उल्लंघन किया है।
निगम क्षेत्र में 138 तालाबों पर हो चुके अतिक्रमण को हटाने पर पूरे साल कार्रवाई नहीं की गई। निगम बोर्ड ने तालाबों को कब्जामुक्त कराने के लिए 50 लाख का बजट भी आरक्षित किया था। वर्ष के अंत में यह बजट सरेंडर करना पड़ा।
कड़कड़ मॉडल गांव निवासी सुशील राघव ने तालाबों पर अतिक्रमण के खिलाफ एनजीटी में जनहित याचिका दाखिल की थी। इस मामले में गाजियाबाद डीएम, जीडीए, नगर निगम यूपी के चीफ सेक्रेटरी को पार्टी बनाया था। इस मामले से हड़कंप मचा तो नगर निगम अफसरों ने बोर्ड बैठक में मामला रखा।
निगम बोर्ड ने वर्ष 2014 के बजट में एक करोड़ का बजट तालाबों को कब्जामुक्त कराकर सौंदर्यीकरण के लिए दिया गया था। बीते साल भी इस पर निगम ने काम नहीं किया। वर्ष 2015-16 में यह बजट कम कर 50 लाख रुपये कर दिया गया।
इस साल भी निगम ने तालाबों को बचाने की पहल नहीं की। यह बजट लैप्स हो गया। हालांकि निगम पार्षदों और महापौर ने इस पर चिंता जताई है और बजट को बढ़ाकर दोगुना किया गया है।
महापौर बोले
तालाबों के जीर्णोद्घार पर इस बार विशेष तौर से काम किया जाएगा। डूंडाहेड़ा, सिकरोड़, मकनपुर समेत कई तालाबों को चिह्नित भी कर लिया गया है। इस मद में बजट 50 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ किया गया है। - अशु वर्मा, महापौर