फैजाबाद एक्सप्रेस की कपलिंग टूटते ही बोगियां पलट गई और उसमें सवार सैकड़ों यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कपलिंग टूटते ही इंजन समेत 11 डिब्बों वाला हिस्सा करीब दो किमी तक चला और पीछे छूटे आठ डिब्बे काफी दूर जाकर पलट गए। यह हादसा उस समय हुआ, जब ट्रेन 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर था।
कपलिंग टूटने के बाद फैजाबाद एक्सप्रेस दो हिस्सों में बंट गई। जिसकी आठ बोगियां ट्रैक को उखाड़ती हुईं पलट गईं। जबकि इंजन समेत 11 बोगियां वाला हिस्सा करीब दो किमी दूर तक जा पहुंची। हादसा होते ही यात्रियों को जबरदस्त झटका लगा।
यात्रियों ने बताया कि उन्हें भूकंप जैसा महसूस हुआ। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। एसी कोचों की खिड़की पूरी तरह लॉक हो गईं। जिससे ट्रेन में सवार किसी भी यात्री को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल पाया। ट्रेन की बोगियां पलटने से उसमें सवार महिला-बच्चों समेत 150 से भी अधिक यात्री और स्टाफ कर्मी घायल हो गए।
खिड़कियां तोड़कर निकाले यात्री
हादसे की सूचना पर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। उन्होंने एसी कोच में खिड़कियों को तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला। बच्चों और महिलाओं में चीख-पुकार मच गई। 15 से 20 से लोगों के सिर और हाथों में चोट आई। जबकि 100 से अधिक लोग चोटिल हो गए। ट्रेन में सवार यात्रियों ने भी अपने सहयात्रियों की मदद की।
मेरठ-गाजियाबाद के अस्पतालों मेें भेजे यात्री
सूचना मिलते ही डीएसपी सतीश चंद्र पांडेय, तहसीलदार भगत सिंह, इंस्पेक्टर समरजीत सिंह, एसएसआई हरपाल सिंह, ब्रजघाट चौकी इंचार्ज बलबीर सिंह मौके पर पहुंचे। रेलवे अफसरों ने सरकारी और निजी एबुलेंसों से स्थानीय सरकारी और निजी अस्पताल में घायल यात्रियों को भर्ती कराया। कई यात्रियों को मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद के अस्पतालों में भेजा गया है।
इलेक्ट्रिक ट्रेन होती होता बड़ा हादसा
गनीमत रही कि फैजाबाद एक्सप्रेस डीजल के इंजन से चल रही थी। अगर ट्रेन बिजली से संचालित होती तो खंभे और लाइन टूटने पर बड़ी अनहोनी हो सकती थी। दर्जनों यात्री हताहत भी हो सकते थे। डीजल इंजन के कारण एक बड़ा हादसा भी टल गया।
पहले आया धूल का गुबार, फिर लगा झटका
ट्रेन की बोगियां पलटने से डिब्बों में सबसे पहले धूल का गुबार भर गया। यात्रियों को आंधी चलने जैसे हालात नजर आए। कुछ ही पलों में जबरदस्त झटका लगा और ट्रेन रुक गई। फैजाबाद जा रहे कलीम खान, उनकी बीवी निशा खातून, विवेक, मुहम्मदीन, उनकी बीवी बानो, बेटी सकीना, धेवते ताबिश और बस्ती जा रहे मेंहदी हसन ने बताया कि वह उस समय खाना खा रहे थे। काफी देर तक समझ में ही नहीं आया कि हुआ क्या है। फिर थोड़ी देर में चीख-पुकार मच गई। कई लोग वहां आ गए।
सामान छोड़कर डिब्बों से कूदे यात्री
लखनऊ जा रहे सुनील सिंह, उनकी पत्नी अर्पणा, जयपाल सिंह, हरकेश ने बताया कि हादसा होने के बाद हर किसी को अपनी जान बचाने की पड़ी थी। यात्री बचने के चक्कर में अपना सामान भी छोड़कर डिब्बों कूद गए।