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अन्य केंद्रों के लिए भी: नोटबंदी की वजह से एक साल बाद डाली थी डकैती-Ghaziabad city

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नोटबंदी के कारण एक साल बाद डाली डकैती

गाजियाबाद। वसुंधरा सेक्टर-2 सी में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज अग्रवाल के घर डाली गई डकैती का खुलासा शनिवार को पुलिस ने कर दिया है। पुलिस ने वारदात में शामिल पांच बदमाशों को गिरफ्तार कर लूटी गई नकदी और कुछ ज्वेलरी भी बरामद कर ली हैं। गिरफ्तार बदमाशों ने पहले 2015 में और फिर 2016 में डकैती डालने की योजना बनाई थी, लेकिन नोटबंदी की वजह से नकदी कम मिलने की आशंका से उन्होंने प्लानिंग टाल दी थी। अब एक साल बाद रेकी कर डकैती डाली।
डकैती डालने वाले सिरौली बरेली निवासी गौरव ठाकुर उर्फ सोनू उर्फ डॉक्टर, योगेंद्र पाल उर्फ सत्ते उर्फ पव्वा निवासी बदहोली खरखौदा (मेरठ), सोनू निवासी मंसूरपुर अरनिया (बुलंदशहर), दीपक उर्फ अमित उर्फ एप्पल निवासी डासोली बुलंदशहर और बल्लू उर्फ बलवीर निवासी मंसूरपुर अरनिया बुलंदशहर को गिरफ्तार किया है। बल्लू फिलहाल रामगढ़ी हापुड़ और योगेंद्र नंदग्राम गाजियाबाद में रह रहा था। इनका एक और साथी व डकैती का मास्टर माइंड लंबू उर्फ राम जाटव फरार है। एसएसपी एचएन सिंह ने बताया कि न्यूरोलॉजिस्ट नीरज अग्रवाल के घर में 2015 में एक नौकरानी काम करती थी। उसका जीजा राजीव अपराधी किस्म का व्यक्ति है। 2015 में नौकरानी ने अपने जीजा को डॉक्टर के पास बहुत सारी नकदी होने की बात बताई थी। राजीव ने डॉक्टर के घर डकैती डालने की योजना बनाई और बुलंदशहर निवासी सोनू समेत मुजफ्फरनगर जेल में बंद कुछ साथियों से बात की। डॉक्टर के घर की रेकी भी की थी, लेकिन टीम न जुटा पाने से राजीव वारदात को अंजाम नहीं दे सका। 2016 में टीम जुटाई तो नोटबंदी हो गई। इसके बाद बदमाशों को आशंका थी कि डॉक्टर के पास नकदी कम होगी। इसलिए उन्होंने वारदात नहीं की। एसएसपी ने बताया कि इसके बाद उन्होंने अन्य जिलों में लूट और डकैतियां डालीं। नवंबर में लंबू उर्फ राम जाटव और सोनू ने अपना गिरोह तैयार किया और मरीज बनकर घर में घुसका डॉक्टर व उनके परिवार को बंधक बनाकर वारदात की। एसएसपी ने बदमाशों तक पहुंचकर डकैती का खुलासा करने वाली टीम को 25 हजार रुपये का नगद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
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11 नवंबर को की थी रेकी
एसएसपी के मुताबिक बदमाशों ने बताया कि वारदात को अंजाम देने से पहले 11 नवंबर को मकान की रेकी की थी। बदमाश सिर्फ मकान ही नहीं आसपास की लोकेशन भी देखकर गए थे कि कहां से भागना है। इसके बाद एक दिन फिर उन्होंने रेकी की और 28 नवंबर को वारदात कर डाली।

पुलिस सीसीटीवी फुटेज व बाइक के नंबर से पहुंची बदमाशों तक
एसएसपी ने बताया कि पुलिस को डॉक्टर के घर के पास लगे सीसीटीवी से फुटेज मिली थी। इसमें बदमाशों के चेहरे दिखाई दे रहे थे। वारदात के समय एक बाइक पर दो नंबर प्लेट लगी हुईं थीं। लोगों को शक हुआ तो उन्होंने एक नंबर प्लेट हटाकर नीचे लगी प्लेट से बाइक का असली नंबर नोट कर लिया था। लोगों ने यह सुराग पुलिस को दिया और पुलिस असली बदमाशों तक पहुंच गई। एसएसपी ने पुलिस को सहयोग देने पर स्थानीय लोगों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि पब्लिक की मदद से केस को खोलने में आसानी हो गई थी।

बुलंदशहर में पशु व्यापारी से लूट, तीन जिलों में की थी डकैती
एसएसपी ने बताया कि पकड़े गए बदमाश कई जिलों में लूट और डकैती की बड़ी वारदातें कर चुके हैं। उन्होंने 2016 में पशु व्यापारी से दिनदहाड़े 23 लाख रुपये की लूट की थी। 2014 में मीरापुर मुजफ्फरनगर और इसी साल टीपी नगर मेरठ में डकैती डाली थी। इससे पहले बदमाशों ने 2006 में जयपुर राजस्थान में भी डकैती डाली थी। एक बदमाश के खिलाफ 10 केस गाजियाबाद जिले में ही दर्ज हैं और वह पहले जेल भी जा चुका है।
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यह सामान हुआ बरामद
पुलिस ने पकड़े गए बदमाशों से 2.60 लाख रुपये, आठ चांदी के सिक्के, गिन्नी, आईफोन, चार चांदी के गिलास, एक घड़ी, दो बाइक, एक बैग, दो पिस्टल, दो तमंचे, 18 कारतूस और एक चाकू बरामद किया है।
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