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पूर्व चीफ इंजीनियर के घर आईटी सर्च

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किंपनी के जरिए ठेके लेकर खड़ा किया ‘साम्राज्य’
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आयकर विभाग ने शुक्रवार को गाजियाबाद और मेरठ में चीफ इंजीनियरों और ठेकेदारों के यहां छापा मारा। देर रात तक चली कार्रवाई में टीम को करोड़ों रुपये से जुड़ी संपत्ति के कागजात, बैंक अकाउंट व लॉकर की जानकारी मिली है, जिनकी जांच जारी है।

आयकर विभाग का दावा है कि गाजियाबाद में सिंचाई विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर के वसुंधरा स्थिति आवास व कंपनी पीकेएस इंफ्रा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड से कई अहम रिकार्ड मिले हैं।
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वहीं, मेरठ, नोएडा, मुजफ्फरनगर और दिल्ली में चीफ इंजीनियर सुधीर कुमार शर्मा और ठेकेदार अजय चौधरी से भी संदिग्ध खाते व प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले हैं।

शुक्रवार सुबह आयकर विभाग ने वसुंधरा सेक्टर-12 स्थित पीके इंफ्रा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तर व कंपनी के निदेशक सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर पुष्पेंद्र गोयल के घर पर छापा मारा।

कंपनी से ही जुड़े अभियंता खेमचंद की पत्नी, बेटे से जुड़े ठिकानों पर भी कार्रवाई की गई। इस दौरान आयकर टीम ने कंपनी के दफ्तर और घरों को खंगाला। घर में रह रहे किरायेदारों को भी बाहर जाने की इजाजत नहीं दी गई, जो बृहस्पतिवार रात को नैनीताल से लौटे थे।

टीम ने मौके पर खड़ी मिली तीन गाड़ियों को भी खंगाला। आयकर अधिकारियों ने बताया है कि कंपनी में पुष्पेंद्र कुमार गोयल के साथ अभियंता खेमचंद की पत्नी व बेटे भी हिस्सेदार हैं। कंपनी ने बीते पांच-सात सालों में सिंचाई, गंगा केनाल, पीडब्ल्यूडी जैसे विभागों से बड़ी संख्या में ठेके हासिल किए हैं।

इसके साथ ही कुछ दूसरी कंपनियों से जुड़े कागजात भी हाथ लगे हैं, जिनकी जांच चल रही है। मूलरूप से बिजनौर निवासी पुष्पेंद्र कुमार गोयल वसुंधरा सेक्टर-15 में परिवार के साथ रहते हैं जो साल 2008 में अलीगढ़ से चीफ इंजीनियर सिंचाई के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। चौंकाने बात है कि कंपनी का गठन सेवानिवृत्त होने से पहले कर दिया गया था, जिससे जुड़ा दस्तावेज आयकर टीम के हाथ लगने की बात सामने आ रही है।


उधर, मेरठ के चीफ इंजीनियर सुधीर कुमार शर्मा के मेरठ स्थित सरकारी घर व दफ्तर के साथ ही नोएडा सेक्टर 93 स्थित पार्श्वनाथ अपार्टमेंट फ्लैट पर छापा मारा गया। जहां से कई प्रॉपर्टी के कागजात व लॉकर की जानकारी हाथ लगी है।
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सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार अजय चौधरी के मेरठ, दिल्ली व मुजफ्फरनगर स्थिति ठिकानों पर कार्रवाई के बाद आठ कंपनियों की जानकारी मिली है जिनमें दो कंपनियां भाईयों, एक पिता और बाकी स्वयं के नाम पर पंजीकृत थी। साथ ही एक बिल्डर के साथ हिस्सेदारी का भी पता लगा है।
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