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हां मैं दोषी हूं, मुझे सजा मिलनी चाहिए

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हां मैं दोषी हूं, मुझे सजा मिलनी चाहिए
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गाजियाबाद। हां मैं दोषी हूं, मुझे मेरे किए की सजा मिलनी चाहिए। मैंने कभी नहीं सोचा था कि अपने परिवार को खत्म कर दूंगा, लेकिन हालात ने मेरे से ऐसा करा दिया। पत्नी और तीन बच्चे के हत्यारोपी सुमित ने कोर्ट जाते समय मीडिया के सामने बातें कहीं।
पुलिस लाइन में दोपहर करीब सवा दो बजे पुलिस हत्यारोपी सुमित को कोर्ट में पेश करने के लिए ले जा रही थी। इस दौरान अमर उजाला ने हत्यारोपी से सवाल किया कि क्यों उसने अपने जिगर के टुकड़ों का बेरहमी से कत्ल कर दिया और पत्नी को भी मौत के घाट उतार दिया। बार-बार पूछने के बाद भी आरोपी चुप रहा। फिर एक साथ बोलता है, हां मैं दोषी हूं, मुझ से बड़ा गुनाह हुआ है। मैंने अपने ही परिवार को अपने ही हाथों से खत्म कर दिया। बस मैं यही कहूंगा मैं गुनहगार हूं, मुझे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। कहा कि नौकरी छूटने के कारण परिवार की मदद नहीं कर पा रहा था। इसको लेकर बहुत परेशान रहता था। तीन बच्चे थे, उनमें से एक बच्चा ही पढ़ रहा था। आर्थिक तंगी के कारण दो बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। अप्रैल में उनका प्रवेश करना था, लेकिन नहीं करा पाए। यह बातें बहुत परेशान करती थीं। बच्चों को देखकर भी दुख होता था, जब दूसरे लोगों के छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल जाते हुए देखता था।
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- चेहरे पर दिखा पछतावा, नहीं उठाया चेहरा
हत्यारोपी सुमित के चेहरे पर पछतावा साफ छलक रहा था। उसने पुलिस लाइन में प्रवेश करने से लेकर जेल जाने तक चेहरा ऊपर नहीं उठाया। वह रोता रहा, लेकिन उसकी आंखों से एक भी आंसू नहीं टपक रहे थे। वह सवाल पूछने के दौरान रोता रहा। बाद में उसने बोलना बंद कर दिया।
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