गाजियाबाद। जाली करेंसी के चार सौदागरों को कोर्ट ने कैद और नकद जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी युवती को सात साल जबकि बाकी तीन आरोपियों को कोर्ट ने दस-दस साल कैद की सजा सुनाई है। इनमें से एक आरोपी अभी फरार है।
सीबीआई विशेष न्यायाधीश राजेश चौधरी ने उसकी संपत्ति कुर्क करने के आदेश के साथ ही उसके गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। कोर्ट ने तीन आरोपियों पर 1.25-1.25 लाख और चौथे पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
सीबीआई लोक अभियोजक एससी मीना ने बताया कि 6 अप्रैल 2014 को सीबीआई इंस्पेक्टर एससी भागवत की टीम ने मुरादाबाद स्टेशन से शालू और कासिम को गिरफ्तार कर दोनों के पास से करीब तीन लाख रुपये की जाली करेंसी बरामद की थी।
आरोपी जाली नोट पश्चिम बंगाल से लेकर फरक्का एक्सप्रेस से आ रहे थे। सीबीआई टीम कई दिनों से जाली करेंसी के इन सौदागरों के पीछे लगी थी। जाली करेंसी की यह खेप दोनों को हनीफ और अफजल उर्फ टिक्का को देनी थी। बाद में सीबीआई ने अफजल और हनीफ को भी गिरफ्तार कर उनके पास से भी जाली नोट बरामद किए थे।
लोक अभियोजक ने बताया कि शालू और कासिम रामपुर के रहने वाले हैं जबकि हनीफ मुरादाबाद और अफजल उर्फ टिक्का पश्चिम बंगाल के मालदा जिले का रहने वाला है। इनमें से हनीफ फिलहाल जमानत पर था। उसे आज कोर्ट में पेश होना था मगर वह नहीं आया। इस पर कोर्ट ने उसे फरार मानते हुए कार्रवाई की।
सोमवार को डासना जेल में बंद आरोपी शालू, कासिम और अफजल उर्फ टिक्का को कोर्ट में पेश किया गया। विशेष न्यायाधीश राजेश चौधरी ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया। इसके बाद कोर्ट ने शालू को 7 साल, कासिम और अफजल को 10-10 साल के कैद की सजा सुनाई।
तीनों पर कोर्ट ने सवा-सवा लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। फरार आरोपी हनीफ पर भी कोर्ट ने दस साल कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही हनीफ के गैर जमानती वारंट जारी करते हुए उसकी संपत्ति कुर्क करने के भी आदेश दिए।