स्थानीय निधि लेखा विभाग की ऑडिट रिपोर्ट में नगर निगम में बड़ी वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। 2016-17 के इन मामलों में सबसे बड़ा गोलमाल 23 करोड़ से ज्यादा की धनराशि लेखाधिकारी ( एकाउंट आफिसर ) से एडवांस में लेकर काम कराने के बाद कोई बिल न देने का है। इसका अर्थ यह हुआ कि इतनी बड़ी रकम कहां और कैसे खर्च की गई, अफसरों ने इसका कोई हिसाब ही नहीं दिया।
रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि इस गड़बड़ी से निगम को 23 करोड़ 30 लाख 30 हजार 603 रुपये की आर्थिक क्षति हुई। पांच दिन पहले विधान सभा में रखी गई ऑडिट रिपोर्ट में गाजियाबाद के नगर निगम में वित्तीय अनियमितता, गड़बड़ी और शासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन के और भी कई मामले हैं। एक और मामला निगम के प्रकाश विभाग का है।
इसमें बताया गया है कि बिना निविदा आमंत्रित किए पूर्व स्वीकृत दरों पर बिजली का सामान खरीदकर फर्म को एक करोड़ 56 लाख 43 हजार 765 रुपये का भुगतान कर दिया गया।
नियम यह है कि 30 लाख से अधिक की खरीद बिना निविदा के नहीं की जा सकती है। जाहिर है, नियमों के विपरीत जाकर इतनी बड़ी धनराशि के सामान खरीदने के पीछे कोई खेल जरूर रहा होगा।
इसी तरह का मामला 72 वाट की एलईडी स्ट्रीट लाइट की खरीद का है। इसमें 12 लाख से अधिक का भुगतान किया गया लेकिन फाइल में कोई निरीक्षण आख्या ही नहीं है। नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किए जाने के कुल 12 मामले ऑडिट रिपोर्ट में दिए गए हैं। इनमें 28 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया।
डीजल-पेट्रोल के भुगतान में भी खेल
2016-17 में नगर निगम के अफसरों ने डीजल और पेट्रोल खर्च के रूप में चार लाख 92 हजार 238 रुपये का भुगतान किया। तआज्जुब यह देखकर होता है कि इसे लाग बुक में दर्ज ही नहीं किया गया।
जीडीए ने खोद दी 46 लाख की सड़क
नगर निगम ने सड़क सुधार योजना से अनुदान लेकर 46 लाख रुपये में जो सड़क बनाई, उसे कुछ दिन बाद ही जीडीए ने खोद डाला। पूरी सड़क उखड़ गई। निगम ने जीडीए से क्षतिपूर्ति भी नहीं ली।
सफाई कर्मियों के भुगतान में की अनियमितता
नियम के अनुसार सफाई कर्मियों को भुगतान सीधा उनके खाते में किया जाता है। लेकिन, इसकी अनदेखी की गई। 24 लाख रुपये पहले स्वास्थ्य अधिकारी के खाते में जमा कराए। इसके बाद सफाई कर्मियों को दिए गए।
किराया कम लेकर पहुंचाया नुकसान
निगम के अफसरों ने कर्मचारियों को आवंटित आवास का किराया तय दर से भी कम किया। इससे नगर निगम को सीधे तौर पर 24 लाख 78 हजार रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
रिपोर्ट मिलने पर होगी कार्रवाई
नगर आयुक्त डाॅ. नितिन गौड़ का कहना है कि ऑडिट रिपोर्ट अभी उन्हें मिली नहीं है। रिपोर्ट मिलने के बाद इसका अवलोकन कराया जाएगा। जो भी गड़बड़ी मिलेगी, जांच कराकर उस पर कार्रवाई कराई जाएगी।