- यूरोप की जर्नल ऑफ क्लिनिकल वायरोलॉजी में जिले के दंपति का लेख प्रकाशित - शोध में कोरोना के प्रभाव और उसे निष्क्रिय करने के दिए गए सुझाव माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। गाजियाबाद में रहने वाले प्लांट बायोलॉजिस्ट दंपति के कोरोना वायरस पर किए गए शोध को यूरोप की जर्नल ऑफ क्लिनिकल वायरोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। शोध में शरीर पर कोरोना के बदलते प्रभाव और उसके असर को निष्क्रिय करने के सुझाव भी दिए गए हैं। गगन एंक्लेव में रहने वाले मनीष तिवारी और उनकी पत्नी डॉ.दिव्या मिश्रा ने विश्व में प्रारंभिक स्तर पर कोरोना से संक्रमित 591 लोगों के जिनोम पर शोध किया। मनीष ने शोध के बारे में बताया कि कोरोना वायरस का प्रभाव अलग-अलग देशों में यहां तक की एक व्यक्ति से दूसरे के बीच भी अलग-अलग तरीके से पड़ता है। इसके पीछे का मूल कारण कोरोना वायरस के जीनोम संरचना में छिपा है। जो अलग-अलग परिस्थितियों में खुद को बदलता रहता है। कोराना वायरस के जीनोम में परिस्थितियों के हिसाब से अनुकूलन क्षमता होने के कारण ये संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है। कोरोना वायरस की जीनोमिक संरचना में कुछ न्यूक्लोटाइड्स का बदलाव पाया गया। इसके कारण अमिनो एसिड बदल जाता है। ऐसे ही कुछ अमिनो एसिड के परिवर्तन से जीका वायरस, एचआईवी और ईबोला में एंटीवायरल थेरेपी और निरोधात्मक दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध पाया गया। इसके चलते कोरोना वायरस के इलाज में एचआईवी प्रतिरोधक कुछ दवाईयों को लिया गया था। जो बहुत ही छोटे स्तर पर कामयाब रहीं लेकिन, बड़े स्तर पर फेल हो गईं। शोध में सुझाव दिया गया है कि जीनोमिक संरचना को समझ के ही इलाज की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। कोरोना वायरस के इलाज के लिए कई दवाईयों के मिश्रण का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। मनीष का कहना है कि यूरोप की जर्नल ऑफ क्लिनिकल वायरोलॉजी में ऐसे शोध प्रकाशित किए जाते हैं, जो विश्व में मुख्य बिंदुओं, बीमारियों व सूक्ष्म आधार पर किए शोध हैं। मान्यता के बाद ही इसमें शोध प्रकाशित होते हैं। ---------------