कोरोना योद्धा: सास-ससुर के सहयोग से मरीजों की कर रही हूं सेवा माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। कोविड अस्पताल के नाम से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी सहित प्रशासनिक अधिकारी भी बचते हैं। लेकिन अस्पताल में युवा लैब टैक्नीशियन मिशाल पेश कर रहे हैं। दिन-रात मरीजों के बीच रहकर न सिर्फ उनकी सेवा कर रहे हैँ, बल्कि मरीजों का हौसला भी बढ़ा रहे हैँ। अमर उजाला से बातचीत में महिला लैब् टैक्नीशियन ने इस काम में सबसे बड़ा सहयोग अपने सास-ससुर का बताया। जबकि पुरुष टैक्नीशियन का कहना है कि इस तरह का संकट देश में पहली बार आया है जो सेवा का बहुत बड़ा मौका दे रहा है। पॉजिटिव मरीजों का लेती हैं सैंपल भोजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर टीबी विभाग में कार्यरत लैब टैक्नीशियन शबिस्ता अंजुम की ड्यूटी इस समय कोविड अस्पताल मुरादनगर में लगी है। वह पॉजिटिव मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजती हैं। शबिस्ता ने बताया कि तीन अप्रैल से कोविड अस्पताल शुरू हुआ उसके बाद से घर नहीं गई हूं। सभी लोग एक अस्पताल में कोरेंटीन रहकर काम कर रहे हैँ। उन्होंने बताया कि घर से बाहर रहकर मरीजों की सेवा करने के लिए सबसे अधिक प्रोत्साहित उनकी सास नसीन बानो और ससुर इकरामुद्दीन ने किया। दोनों का कहना है कि ऊपर वाला बीमारों की सेवा करने का मौका हर किसी इंसान को नहीं देता है, यह मौका मिला है तो इसमें खुद को साबित करके दिखाओ। शबिस्ता का कहना है कि पति गुफरान अली से फोन पर बात होती है तो वह भी मरीजों की सेवा में किसी प्रकार की लापरवाही न करने की सलाह देते हैं। परिवार का मानना है कि इस तरह से अल्लाह समाज की भलाई का मौका दे रहा है। उन्होंने बताया कि मरीजों का सैंपल लेने के अलावा उन्हें मानसिक रूप से मजबूत भी बनाया जाता है। ----------------------- मेडिकल सेवा में यह अलग अनुभव सीएचसी मोदीनगर के टीबी एलटी मनीष कुमार की भी ड्यूटी इस समय कोविड अस्पताल में चल रही है। वह अब तक बीस पॉजिटिव मरीजों का सैंपल ले चुके हैं। मनीष का कहना है कि मेडिकल क्षेत्र में आने का यह अलग ही अनुभव हो रहा है। उन्होंने बताया कि हम प्रतिदिन टीबी के उन मरीजों का सैंपल लेते हैँ जो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैँ, क्योंकि साधन संपन्न लोग प्राइवेट में जाकर सैंपल की जांच करा लेते हैँ, लेकिन कोविड अस्पताल में यह नया अनुभव हो रहा है कि मरीज को पता नहीं और वह कोरोना के संक्रमण से पीड़ित है। मनीष का कहना है कि कोरोना बहुत दिन नहीं चलेगा, लेकिन आने वाले समय में बच्चों के लिए यह एक कहानी के रूप में याद किया जाएगा कि किस तरह से कोरोना ने पूरे विश्व को संकट में डाला था। इसी उत्साह से हम लोग लगे हैं कि जितना अधिक से अधिक अपना योगदान दे सकें उतना ही कम है। लोहिया नगर निवासी मनीष ने बताया कि जब से कोविड अस्पताल में मरीजों की सैंपलिंग करने के लिए आए हैं तब से घर के किसी सदस्य से मिला नहीं हूं, संभावित संक्रमण का असर और लोगों में न फैले इसलिए यहीं मुरादनगर में डिडौली में एक अस्पताल में कोरेंटीन में रह रहा हूं। उन्होंने बताया कि घर से आते समय पत्नी और मम्मी नहीं चाहती थीं कि कोविड अस्पताल में ड्यूटी करने जाऊं, लेकिन पापा ने दोनों को समझाया कि सेवा का मौका मिल रहा है जाने दो तब से अस्पताल में रह रहा हूं, अभी एक सप्ताह और लगातार रहने के बाद ही घर जाऊंगा। ---------