गाजियाबाद। अधिवक्ता पवन त्यागी को शांतिभंग में जेल भेजे जाने के मामले में वकीलों का पुलिस के साथ टकराव बढ़ता ही जा रहा है। तीन दिन से हड़ताल पर चल रहे वकीलों ने बृहस्पतिवार को भी न्यायिक कार्य न करने का एलान कर दिया है। इस मुद्दे बार बुधवार को बैठक बुलाकर बार ने पुलिस अफसरों के सामने तीन मांगे रखी हैं। दो दिन का अल्टीमेटम देकर कहा है कि इसके बाद आंदोलन और तेज कर दिया जाएगा। वकीलों की तैयारी पश्चिमी यूपी के सभी जिलों की कचहरी में हड़ताल कराकर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन करने की है। उधर, पुलिस अफसर उनकी मांगे मानने के लिए तैयार नहीं है।
बार की प्रमुख मांग उन अफसरों और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है, जिन्होंने पवन त्यागी को जेल भेजा था। बार अध्यक्ष योगेंद्र कौशिक व सचिव नितिन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को बार सभागार में हुई बैठक में बताया गया कि गाजियाबाद बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय समिति से समर्थन के लिए आह्वान किया है। कई जिलों की बार एसोसिएशन ने समर्थन भी दे दिया है।
हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय समिति के चेयरमैन व महामंत्री ने गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को पत्र भेजकर दो दिन का अल्टीमेटम देकर अधिवक्ताओं की मांगों को पूरा करने को कहा है। चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर 19 मई से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में अधिवक्ता हड़ताल करेंगे। उधर, गाजियाबाद कचहरी में लगातार तीसरे दिन बुधवार को सभी 2800 अधिवक्ता हड़ताल पर रहे। कचहरी में रोज 10 हजार वादकारी आते हैं।
जाम लगाने का प्रयास
वकीलों ने कमिश्नरेट के सामने जाम लगाने का प्रयास भी किया लेकिन पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया। इससे पहले नौ बजे से ही कचहरी के सभी गेट बंद कर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। एलआईयू के दरोगा और सिपाही को कचहरी में प्रवेश नहीं करने दिया गया।
11 सदस्यीय कमेटी बनाई
इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने व आंदोलन की आगे की रूपरेखा तैयार करने के लिए 11 सदस्यों की फैक्ट फाइडिंग कमेटी बनाई गई है। इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता मुनीश त्यागी, कुंवर अय्यूब अली, रणवीर डागर, सत्यपाल यादव, सत्यकेतु सिंह, अनिल पंडित, भोपाल सिंह यादव, सुनील दत्त त्यागी, शिवकुमार गुप्ता, चंद्रकात सिंह, सुबोध त्यागी व संतोष कुमार शामिल हैं।
पुलिस आयुक्त से वकीलों की मांग
1. एसीपी निमिष पाटिल का कार्यक्षेत्र तत्काल बदला जाए, साथ ही थानाध्यक्ष निवाड़ी, दरोगा गौरव व सिपाही को निलंबित किया जाए।
2. शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किए जा रहे लोगों को एसीपी कोर्ट में पुलिस द्वारा जमानतियों के सत्यापन कराने के नाम पर जेल भेजने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।
3. एसीपी कोर्ट में अधिवक्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
एसीपी ने मांगें मानने से किया इन्कार
अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (एसीपी) दिनेश कुमार पी. से मिलने पहुंचा। अधिवक्ताओं ने मांगें रखी लेकिन एसीपी ने पुलिसवालों पर केस करने और एसीपी निमिष पाटिल का कार्यक्षेत्र बदलने से साफ इन्कार कर दिया। ऐसे में गुस्साए अधिवक्ता पुलिस कार्यालय से नारेबाजी करते हुए बाहर आए और हापुड़ रोड पर पहुंच गए। दो मिनट तक नारेबाजी करने के बाद वापस चले गए।
जो पैसे न दे, उसे भेज रहे जेल
वकीलों ने पुलिस पर बुधवार को एक और आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कमिश्नरेट बनने के बाद 107/ 16 (मुचलका पाबंदी) और शांति भंग (धारा -151) को पुलिस ने कमाई का जरिया बना लिया है। इन धाराओं में जो लोग पुलिस को पैसा दे देते हैं, उन्हें मुचलके भरवाकर छोड़ दिया जाता है। जिससे पैसा नहीं मिलता है, उसे जेल भेज दिया जाता है। एसीपी कार्यालयों में अधिवक्ताओं के साथ बदसलूकी की शिकायतें भी लगातार आ रही हैं। उधर, डीसीपी नगर निपुण अग्रवाल का कहना है कि उन्हें वकीलों की ओर से ज्ञापन नहीं मिला है। वकीलों की एक मांग पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज करने की है। केस दर्ज नहीं किया जाएगा।
बढ़ता जा रहा विवाद
14 मई : भनेड़ा गांव में लूट की सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामला संदिग्ध लगने पर वकील पवन त्यागी और शैंकी नाम के युवक के बीच झगड़ा बताकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
15 मई : पवन त्यागी को जेल भेजे जाने से अधिवक्ता भड़क गए और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ हड़ताल पर चले गए।
16 मई : पवन त्यागी की रिहाई और अन्य मांगों के लिए अधिवक्ताओं ने आठ घंटे जाम लगाया। पुलिस ने पवन त्यागी को जमानत पर रिहा किया।