गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल में भर्ती मरीजों को गुणवत्ता पूर्ण खाना और इमरजेंसी में पानी नहीं मिलने पर मरीज के तीमारदार ने ट्वीट कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की है। यह भी आरोप लगाया है कि इमरजेंसी में मौजूद चतुर्थ श्रेणी का स्टॉफ मरीजों के साथ रात में दुर्व्यवहार करता है। बेड पर स्वयं सोने के लिए भर्ती मरीजों को रात में भगा देते हैं।
नंदग्राम आदर्शनगर निवासी विंध्यवासिनी पांडेय को शुक्रवार पेट में दर्द हुआ तो उनके पति ए कुमार पांडेय एमएमजी अस्पताल ले गए। आरोप है कि इमरजेंसी में 30 मिनट तक कोई इलाज नहीं मिला। मौके पर पहुंचे डॉ. आरपी सिंह ने भर्ती कर इलाज शुरू किया। शौचालय में जाने पर पानी बंद था, इसलिए बोतल बंद पानी बाहर से खरीद कर लाए। विंध्यवासिनी ने बताया कि अस्पताल में जो खाना उन्हें दिया गया, वह खाने लायक नहीं था, रोटियां जली हुई थीं। दाल व सब्जी भी खराब थी, इस कारण से उन्हें घर से खाना मंगवाना पड़ा। वह तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहीं। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी में शौचालय साफ करने के दौरान ही कर्मचारी पानी की सप्लाई चालू करते हैं। उसके बाद सप्लाई बंद कर देते हैं। इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को टॉयलेट जाने के लिए बाहर से पानी लाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का यह हाल तब है जब केंद्र सरकार मरीजों को गुणवत्ता पूर्ण उपचार दिलवाने के लिए आयुष्मान भव अभियान चला रही है। विंध्यवासिनी ने बताया कि बेड से चादर बदलने के लिए कहने पर वार्ड बॉय लड़ने लगते हैं।
अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी का कहना है कि अस्पताल में मरीजों का खाना बनाने की जिम्मेदारी एक संस्था को दी गई है। खाने की गुणवत्ता की जांच करने के लिए अस्पताल में समिति भी बनी है, जो प्रतिदिन खाने की जांच करती है। यदि खाने में कोई गड़बड़ी है तो उसे दूर कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आरओ प्लांट लगा है, वहीं से सभी मरीज पीने का पानी लेते हैं। वार्ड में भी पीने के पानी के लिए वॉटर कूलर रखवाए गए हैं। इमरजेंसी में भी वॉटर कूलर लगवाने के निर्देश दिए हैं। टॉयलेट में पानी नहीं होने वाली बात गलत है। टंकी से हमेशा पानी की आपूर्ति सुचारू रहती है।
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