गाजियाबाद। ऑटो मोबाइल पार्ट्स बनाने वाली कंपनी मालिक और सहयोगियों के ठिकानों पर चार दिन तक हुई आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद जांच तेजी से की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि 1400 करोड़ रुपये का निवेश ऑनलाइन क्लास और रियल स्टेट में दो से तीन साल में किया गया जबकि कंपनी को लगातार घाटे में दिखाया जा रहा था। 100 घंटे की कार्रवाई के दौरान जुटाए दस्तावेज, मोबाइल और लैपटॉप से विदेशों में भी निवेश के सुराग मिले हैं। इस मामले में 500 करोड़ की कर चोरी मिलने का अनुमान है।
ऑटो मोबाइल पार्ट्स बनाने वाली फैक्टरी के मालिक परमजीत गांधी और उनके सहयोगियों के प्रतिष्ठानों से मिले दस्तावेजों की जांच में आयकर विभाग को बड़े निवेश के सबूत मिले हैं। करीब 32 स्थानों पर एक साथ मारे गए छापे में आयकर टीम द्वारा जब्त किए गए बैंक पासबुक, मोबाइल-लैपटॉप से की गई चैट और मेसेज की जांच की जा रही है।
मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि पिछले पांच-छह साल से फैक्टरी को घाटे में दिखाया जा रहा था जबकि उद्यमी द्वारा पिछले दो-तीन सालों में करीब 1400 करोड़ से ज्यादा का निवेश रियल एस्टेट और ऑनलाइन कोचिंग और स्मार्ट क्लास चलाने वाली फर्म में किया है। विभागीय सूत्रों को कहना है कि पीटीसी दिल्ली मेट्रो में भी माल की सप्लाई को ठेका उद्यमी और उनके सहयोगियों द्वारा लिया गया है। एनसीएलटी में करप्ट कंपनियों को इस ग्रुप की ओर से खरीदने के लिए बड़ी रकम निवेश की गई है।ऑनलाइन क्लास चलाने वाले शांतनु गुप्ता की फर्म तीन साल पहले उद्यमी और उनके सहयोगियों की ओर से करीब 900 करोड़ में खरीदने के साक्ष्य आयकर टीम के हाथ लगे हैं। पिछले छह साल से फैक्टरी को घाटे में दिखाया जा रहा है तो इतनी बड़ी रकम कहां से लाई गई, कितनी संपत्तियां खरीदी व बेची गईं, इन सब का ब्योरा आयकर विभाग खंगाल रहा है।
टीम में शामिल अधिकारियों को कहना है कि जिन जिलों में संपत्तियां खरीदी व बेची गई हैं उन जिलों के रजिस्ट्री दफ्तर में बैनामा से संबंधित दस्तावेजों को एकत्र किया जा रहा है।
चार दिनों तक 100 घंटे चला था छापा
11 जुलाई को उद्यमी परमजीत गांधी के राजनगर सेक्टर-2 स्थित आवास और बुलंदशहर औद्योगिक क्षेत्र और साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र स्थित फर्म समेत देश के 32 ठिकानों पर गाजियाबाद आयकर विभाग की टीम ने एक साथ छापा मारा था। चार दिनों तक करीब 100 घंटे के छापे में करीब 35 करोड़ की नकदी और जेवरात समेत बेनामी संपत्ति के कागजात जब्त किए गए थे। इस कार्रवाई में करीब 200 अधिकारी शामिल थे। गाजियाबाद में 20 स्थानों पर छापे की कार्रवाई की गई थी।