गाजियाबाद। क्षय रोग से संक्रमित बच्चों को दो महीने से दवाई नहीं मिल रही है। इस कारण से नियमित दवाई के सेवन से बच्चे वंचित हो रहे हैं जबकि केंद्र सरकार ने 2025 तक क्षय उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है। विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि 17 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को बड़े मरीजों को दी जाने वाली दवाई तोड़कर दी जा रही है लेकिन इससे दवाई की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। क्षय रोग से संक्रमित 1168 बच्चों का इलाज चल रहा है। इलाज में काम आने वाली दवा क्लोफाजीमाइन टेबलेट, पाइराडाक्सीन टेबलेट, जिलोलिड टेबलेट और आइसोनियाजिड टेबलेट स्टॉक से खत्म है। ऐसे में संक्रमित बच्चों को वजन के अनुसार बड़ों की दवाई तोड़कर दी जा रही हैं। पूर्व जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जेपी श्रीवास्तव का कहना है कि टीबी की दवा बिना कोर्स पूरा हुए रोकना मरीज के लिए बहुत गंभीर होता है। इससे बीमारी गंभीर हो जाती है। इसके बाद हैवी डोज के दवाओं की आवश्यकता पड़ती है। बच्चों के मामले में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
छह वर्ष से कम उम्र के 60 मरीज
छह वर्ष से कम उम्र के 60 मरीजों का इलाज चल रहा है जबकि छह से 17 वर्ष तक के 1108 रोगियों का उपचार चल रहा है। इस आयु वर्ग के रोगियों को बच्चा ही माना जाता है।बच्चों की उपलब्ध कराई जाने वाली एक महीने की दवाइयों की कीमत बाजार में तीन लाख रुपये तक है। विभाग के पास उपलब्ध बजट से पहले ही दवाइयां खरीदी जा चुकी हैं। अतिरिक्त दवाइयों की खरीदारी के लिए शासन से गाइडलाइन मांगी है।
रोटरी से दान में मिली दो हजार टेबलेट
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अमित विक्रम ने बताया कि बच्चों की दवाओं की दो हजार टेबलेट रोटरी ने दान में उपलब्ध कराई हैं। यह दवाई 15 दिन के लिए पर्याप्त है। इसके पहले ही दवाइयां शासन स्तर से उपलब्ध हो जाएंगी।