गाजियाबाद। पिता का नाम बदलकर जीडीए से भवन आवंटित कराने के बाद बेटे के नाम वसीयत कराने के आरोप में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय ने परिवाद दर्ज कर चार आरोपियों के खिलाफ समन जारी करने के आदेश दिया है। सुनवाई के लिए 12 अप्रैल तारीख लगाई है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फ्लैट आवंटन कराने वालों पर मुकदमा चलेगा।अधिवक्ता खालिद खान ने बताया कि इकबाल के पिता अब्दुल गफ्फार उसके भाई जमालुद्दीन के साथ रहते थे। अब्दुल गफ्फार के नाम पहले से जीडीए से भवन आवंटित था। एक नाम पर दो आवंटन नहीं हो सकते थे, इसलिए जमालुद्दीन ने साजिश के तहत पिता अब्दुल गफ्फार की फोटो लगाकर रईस के नाम से उनके फर्जी दस्तावेज तैयार कराया। जीडीए कर्मचारियों के साथ मिलकर प्राधिकरण की स्कीम में भवन के लिए आवेदन किया। 13 दिसंबर 1999 को नन्द निकुंज योजना में रईस के नाम भवन आवंटित हो गया। इसके बाद फर्जी रईस का पोता दिखाकर जमालुद्दीन ने अपने बेटे मोसीन के नाम पांच अक्तूबर 2018 को वसीयत करा ली। नौ मार्च 2021 को अब्दुल गफ्फार (रईस) की मौत हो गई। साजिश के तहत अब्दुल गफ्फार के स्थान पर रईस को कब्रिस्तान में दफन कराने के दस्तावेज तैयार कराए। रईस के नाम से ही मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया। इसके बाद वसीयत के आधार पर फर्जी तरीके से भवन का कब्जा मोसीन के नाम कराकर मनोज कुमार को बेच दिया। आरोप है कि मनोज कुमार को पूरे प्रकरण की जानकारी पहले से थी। इसीलिए उन्हें कम दाम पर 14.50 लाख रुपये में बेचा।