जिला पंचायत द्वारा बनवाए गए मॉल में सदर विधायक की शिकायत पर जांच करते हुए सीडीओ अभिषेक पांडेय ने अनियमितता बरतने की पुष्टि की है। साथ ही आगे की उच्चस्तरीय जांच के लिए डीएम को पत्र लिखकर सिफारिश की है। सीडीओ द्वारा की गई जांच के बाद सदर विधायक ने इसे सच्चाई की जीत और सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत कार्रवाई बताया है।
दरअसल, वर्ष 2013 में जिला पंचायत द्वारा नगर के काला आम चौराहे के पास 29 करोड़ की लागत से एक आवासीय और व्यावसायिक मॉल का निर्माण शुरू कराया था। मॉल का निर्माण शुरू होने के बाद से ही जिपं सदस्यों ने इसमें भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। मॉल का निर्माण पूरा हुआ और उसमें बने आवास और दुकानों का आवंटन भी नियम विरुद्ध कर दिया गया। मॉल की स्वीकृति से लेकर, निर्माण के लिए टेंडर देना, फ्लैट और दुकानों के आवंटन के साथ अन्य प्रकार की गतिविधियों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं बरतीं गईं।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन जिपं अध्यक्ष हरेंद्र यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया और भाजपा के प्रदीप चौधरी को जिपं अध्यक्ष चुना गया था, लेकिन करीब एक वर्ष बाद ही उनके खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव आया और इसके बाद ओमवीर सिंह को जिपं अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद से प्रदीप द्वारा इस मॉल के निर्माण को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव में प्रदीप चौधरी सदर सीट से विधायक चुने गए तो उन्होंने विधानसभा में भी इसके खिलाफ सवाल उठाए और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। जबकि जिले में मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान भी उन्होंने मॉल निर्माण में घोटाले का आरोप लगाते हुए शिकायत सौंपी थी। इस पर डीएम ने मामले में सीडीओ को जांच के निर्देश दिए थे।
अब सीडीओ ने अपनी जांच पूरी करते हुए डीएम को रिपोर्ट भेजी है। सीडीओ ने साफ किया है कि मॉल निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के बाद न तो निर्माण कराने के लिए टेंडर जारी किया और न ही पारदर्शिता के साथ मॉल में बने फ्लैट और दुकानों का आवंटन किया गया। इसके अलावा नियम विरुद्ध तरीके से अधिकार न होने के बाद भी फ्लैट और दुकानों का 90 साल के लिए आवंटन कर दिया गया। इसके बाद सीडीओ अभिषेक पांडेय ने मामले में उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश करते हुए डीएम को पत्र लिखा है।
मॉल निर्माण में घोटाले की लगातार शिकायत की जा रही थी। सीडीओ की जांच से साफ हो गया कि मॉल के निर्माण में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया है। आवंटन भी नियम विरुद्ध किया गया। शासन द्वारा इसकी जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम गठित करने की मांग की गई है। इसके अलावा फर्जीवाड़ा करने वाले दोषियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।
- प्रदीप चौधरी, विधायक सदर