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Ghaziabad: BEL में 1575 करोड़ के घोटाला मामले में CBI की कार्रवाई, छह अधिकारियों समेत 13 के खिलाफ दर्ज किया केस

Tue, 13 Dec 2022 02:13 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद

सार

आरोप है कि बेल अधिकारियों ने रक्षा मंत्रालय की 10 साइटों पर 1,575 करोड़ रुपये के ठेके मनमाने तरीके से दिए और इन कंपनियों को लाभ पहुंचाया।
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सीबीआई (सांकेतिक) - फोटो : Social media
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विस्तार
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रक्षा मंत्रालय के उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के छह अफसरों समेत 13 लोगों पर 1575 करोड़ रुपये के ठेकों में धांधली के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई है। गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित कंपनी के इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने निर्माण कार्य के ठेकों में धांधली की और चहेती कंपनियों को ठेके बांटे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की दिल्ली शाखा ने 16 पेज की एफआईआर में इन अफसरों के अलावा तीन कंस्ट्रक्शन कंपनियों, उनके निदेशकों और एक अज्ञात शख्स को आरोपी बनाया है।

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वर्ष 2011 से 2017 तक दस जगह निर्माण कार्य करने के लिए दिए गए इन ठेकों में काम की गुणवत्ता बेहद घटिया पाई गई। रक्षा मंत्रालय की जांच में यह घोटाला सामने आने के बाद मामला सीबीआई के सुपुर्द किया गया था। जांच एजेंसी ने मंगलवार को भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश वत्सल श्रीवास्तव की कोर्ट में एफआईआर की कॉपी पेश की। इस मामले में रक्षा मंत्रालय में उपसचिव गोकुल नागर कोटी के पत्र पर वर्ष 2021 में गोपनीय जांच शुरू हुई थी। जांच के बाद सीबीआई इंस्पेक्टर अमित कुमार ने दिल्ली शाखा में सात दिसंबर को रिपोर्ट दर्ज कराई। सीबीआई ने माना है कि डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में अनियमितताएं बरती गईं। डीपीआर बनाने के लिए आरडी कंसल्टेंट को रखा गया। इस कंपनी को नामित करने के लिए सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की गईं, जबकि सारी बातचीत आरोपी अधिकारियों ने पहले ही कर ली थी।

घोटाले की दीवार गिरी, भ्रष्टाचार से पर्दा उठा
बीईएल में 1575 करोड़ के ठेके में धांधली की सीबीआई जांच में सामने आया है कि जिन 10 जगहों के निर्माण कार्य के जो ठेका दिए गए थे, उनमें से दो पर जून 2017 में जमीन धंसने की घटनाएं हुईं। एक जगह दीवार गिर गई। इसी से घोटाले की बू आई, क्योंकि निर्माण के दौरान ही दीवार गिरना सामान्य मामला नहीं था। इसके बाद दूसरी जगह दीवार गिरी। इसके बाद जांच शुरू करा दी गई। पता चला कि मिट्टी के भराव में मानकों का पालन नहीं किया गया। इस पर विस्तृत जांच हुई। सीबीआई ने जांच में माना कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि एसओपी तैयार करते समय डिजाइन सलाहकार परिस्थितियों से अवगत नहीं थे। डिजाइन सलाहकार के साथ करार के अनुसार आरडी कंसल्टेंट को महीने में एक बार साइट का दौरा करना था, जो नहीं हुआ।

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ऐसे दिया धांधली को अंजाम
बीईएल अधिकारियों ने मनमाने तरीके से ठेके बांटने में किसी नियम का पालन नहीं किया। आठ सितंबर 2011 को ब्लास्ट प्रूफ के लिए आरडी कंसल्टेंट से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराते समय इन अधिकारियों ने वर्क्स कॉन्ट्रेक्ट मैन्युअल (वीसीएम) को ताक पर रख दिया। रक्षा मंत्रालय की 10 जगहों (साइटों) पर होने वाले निर्माण संबंधी कार्य के लिए जो प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट बनाई गई, उसमें कहीं पर भी डिजाइन और लागत का उल्लेख नहीं किया गया। बीईएल ने चहेती कंस्ट्रक्शन कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए निविदाएं ऑनलाइन की बजाय ऑफलाइन स्वीकार कीं। कंपनियों को 1575 करोड़ के ठेके देते समय बीईएल ने पूर्व योग्यता (पीक्यू) मानदंडों का उल्लंघन करते हुए निविदा डालने वाली कंपनियों को शॉर्ट लिस्ट नहीं किया।

बीईएल प्रबंधक की नियुक्ति पर भी उठाए सवाल
निर्माण कार्यों में हुई इस गड़बड़ी के लिए सीबीआई ने बीईएल गाजियाबाद के प्रबंधक (इंफ्रा) मनीष गोयल को जिम्मेदार ठहराया है। इस पद पर नौकरी के लिए 10 से 12 साल का अनुभव चाहिएए लेकिन मनीष गोयल की जॉइनिंग के समय यह अनुभव नहीं था। आरोप है कि उन्होंने नौकरी पाते समय आवेदन पत्र में ऐप्रेंटिस टेन्योर के तथ्यों को छिपाकर गलत जानकारी दर्ज की। इसके अलावा मनीष गोयल ने वेंडरों द्वारा जमा किए जा रहे बिल का 10 फीसदी सत्यापन भी नहीं किया।

ये हैं आरोपी
  • सुनील शर्मा (बीईएल गाजियाबाद के नेटवर्क सेंटरिंग सिस्टम के महाप्रबंधक)
  • आरके हांडा (बीईएल गाजियाबाद के नेटवर्क सेंटरिंग सिस्टम के महाप्रबंधक)
  • एसएस चौधरी (बीईएलए गाजियाबाद के सीनियर डीजीएमए मार्केटिंग)
  • गुरजीत सिंह (बीईएलए गाजियाबाद के सीनियर डीजीएमए मार्केटिंग)
  • बीपी पाहुजा (डीजीएमए इंफ्रास्ट्रक्टर, बीईएल, बंगलूरू)
  • मनीज गोयल (डीजीएम, इंफ्रास्ट्रक्टर, बीईएल, बंगलूरू)
  • सुरेश कुमार (आरडी कंस्लटेंट कंपनी, ग्रेटर कैलाश, नई दिल्ली में पार्टनर)
  • सुधीर कुमार मारवाह (एसआर अशोक एंड एसोसिएट, नई दिल्ली के निदेशक)
  • राहुल भूचर (सीएस कंस्ट्रक्शन, नई दिल्ली के निदेशक)
  • आरडी कंस्टेंट, वसंत कुंज, नई दिल्ली
  • एसआर अशोका एंड एसोसिएट्स वसंत कुंज, नई दिल्ली
  • सीएस कंस्ट्रक्शन, वसंत कुंज नई दिल्ली
  • एक आरोपी अज्ञात है
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