ऐसे दिया धांधली को अंजाम
बीईएल अधिकारियों ने मनमाने तरीके से ठेके बांटने में किसी नियम का पालन नहीं किया। आठ सितंबर 2011 को ब्लास्ट प्रूफ के लिए आरडी कंसल्टेंट से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराते समय इन अधिकारियों ने वर्क्स कॉन्ट्रेक्ट मैन्युअल (वीसीएम) को ताक पर रख दिया। रक्षा मंत्रालय की 10 जगहों (साइटों) पर होने वाले निर्माण संबंधी कार्य के लिए जो प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट बनाई गई, उसमें कहीं पर भी डिजाइन और लागत का उल्लेख नहीं किया गया। बीईएल ने चहेती कंस्ट्रक्शन कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए निविदाएं ऑनलाइन की बजाय ऑफलाइन स्वीकार कीं। कंपनियों को 1575 करोड़ के ठेके देते समय बीईएल ने पूर्व योग्यता (पीक्यू) मानदंडों का उल्लंघन करते हुए निविदा डालने वाली कंपनियों को शॉर्ट लिस्ट नहीं किया।
बीईएल प्रबंधक की नियुक्ति पर भी उठाए सवाल
निर्माण कार्यों में हुई इस गड़बड़ी के लिए सीबीआई ने बीईएल गाजियाबाद के प्रबंधक (इंफ्रा) मनीष गोयल को जिम्मेदार ठहराया है। इस पद पर नौकरी के लिए 10 से 12 साल का अनुभव चाहिएए लेकिन मनीष गोयल की जॉइनिंग के समय यह अनुभव नहीं था। आरोप है कि उन्होंने नौकरी पाते समय आवेदन पत्र में ऐप्रेंटिस टेन्योर के तथ्यों को छिपाकर गलत जानकारी दर्ज की। इसके अलावा मनीष गोयल ने वेंडरों द्वारा जमा किए जा रहे बिल का 10 फीसदी सत्यापन भी नहीं किया।
ये हैं आरोपी
- सुनील शर्मा (बीईएल गाजियाबाद के नेटवर्क सेंटरिंग सिस्टम के महाप्रबंधक)
- आरके हांडा (बीईएल गाजियाबाद के नेटवर्क सेंटरिंग सिस्टम के महाप्रबंधक)
- एसएस चौधरी (बीईएलए गाजियाबाद के सीनियर डीजीएमए मार्केटिंग)
- गुरजीत सिंह (बीईएलए गाजियाबाद के सीनियर डीजीएमए मार्केटिंग)
- बीपी पाहुजा (डीजीएमए इंफ्रास्ट्रक्टर, बीईएल, बंगलूरू)
- मनीज गोयल (डीजीएम, इंफ्रास्ट्रक्टर, बीईएल, बंगलूरू)
- सुरेश कुमार (आरडी कंस्लटेंट कंपनी, ग्रेटर कैलाश, नई दिल्ली में पार्टनर)
- सुधीर कुमार मारवाह (एसआर अशोक एंड एसोसिएट, नई दिल्ली के निदेशक)
- राहुल भूचर (सीएस कंस्ट्रक्शन, नई दिल्ली के निदेशक)
- आरडी कंस्टेंट, वसंत कुंज, नई दिल्ली
- एसआर अशोका एंड एसोसिएट्स वसंत कुंज, नई दिल्ली
- सीएस कंस्ट्रक्शन, वसंत कुंज नई दिल्ली
- एक आरोपी अज्ञात है