गाजियाबाद। शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर व श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने मुख्य न्यायाधीश को खून से पत्र लिखकर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं किया है। उन्होंने पत्र में कहा है कि सोशल मीडिया की उन खबरों के आधार पर लिखा है, जिनसे पता चला है कि सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें अवमानना का नोटिस देते हुए किसी बयान को सर्वोच्च न्यायालय के इतिहास में सबसे क्रूर हमला बताया है। रविवार को रक्त से लिखे पत्र में महामंडलेश्वर ने पत्र में सफाई दी है कि कभी भी मुसलमानों के नरसंहार का आह्वान नहीं किया था। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी किसी न्यायालय की अवमानना नही की है और ना ही किसी प्रकार की हिंसा का समर्थन किया है। महामंडलेश्वर ने कहा कि हिंदुओं के न्याय के लिए न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका तीनों पर उन्हें विश्वास नहीं है। इसके लिए उनके पास कुछ ठोस कारण हैं। उन्होंने इस्लाम को मस्जिदों और मदरसों से सीखा है। मोहम्मद साहब के जीवन, पवित्र पुस्तक कुरान और इस्लाम के इतिहास को पढ़ा है। सत्य को सबके सामने रखने के कारण ही उनकी हत्या के लिए लाखों की भीड़ ने सार्वजनिक रूप से आह्वान किया। देश के अलग अलग स्थानों पर उनकी हत्या के लिए खुलेआम बड़े बड़े पोस्टर और होर्डिंग्स लगवाए गए। देश की बड़ी बड़ी मस्जिदों में उनकी हत्या पर भारी इनाम घोषित किया गया। पत्र लिखते समय यति रामस्वरूपनन्द, यति असीमानंद, अनिल यादव और डॉ उदिता त्यागी भी उपस्थित थे।