गाजियाबाद। जीएसटी अधिकारियों की टीम ने केमिकल ट्रेडिंग करने वाली सिकंदराबाद, बुलंदशहर की एक फर्म के दस्तावेजों की जांच की। जांच में पाया गया कि इस फर्म ने फर्जी बिलों के जरिए आईटीसी क्लेम ले लिया और दो करोड़ रुपये से ज्यादा रकम की टैक्स चोरी कर ली। इस फर्म ने मेरठ के जिस पते पर एक अन्य फर्म को दर्शाकर उससे खरीद-फरोख्त का दावा किया है, जांच में उस पते पर अधिवक्ता का घर पाया गया। फर्म वहां मिली ही नहीं। फर्म संचालक ने फिलहाल 2.02 करोड़ रुपये जमा करा दिए हैं। गाजियाबाद जोन-2 के अपर आयुक्त (ग्रेड-1) दिनेश कुमार मिश्रा ने बताया कि केमिकल ट्रेडिंग करने वाली इस फर्म की ई-वे बिल के डाटा का आकलन कराया गया। इसमें पाया गया कि फर्म की ओर से मेरठ से ई-वे बिल माध्यम से केमिकल की सप्लाई की जा रही है। इसके बाद अपर आयुक्त (ग्रेड-2) ओपी तिवारी और विशेष अनुसंधान शाखा के संयुक्त आयुक्त विवेक सिंह के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच कराई गई। आठ और नौ अगस्त को की गई जांच में कई फर्जीवाड़े सामने आए हैं। इस फर्म की ओर से मेरठ में दर्शायी गई फर्म की जानकारी कराई गई तो यह आबादी के बीच ऐसी जगह पर दर्शायी गई जहां से केमिकल की सप्लाई करना संभव नहीं था। मेरठ से किए जा रहे इस संदिग्ध व्यापार की जांच के लिए सत्यापन कराया गया तो वहां फर्म की बजाय एक अधिवक्ता का मकान पाया गया। फर्म की ओर से जीएसटी क्लेम भी ज्यादा ले लिया गया था। इसके बाद फर्म के सिकंदराबाद स्थित कार्यालय पर पहुंचकर दस्तावेज जांच के लिए ले लिए। करीब दो करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी पाई गई है।