दरियाव सिंह के क्षेत्र में जाने से डरते थे अंग्रेज, जाने कहानी...
1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों में से एक दरियाव सिंह गुर्जर के डर से अंग्रेज उनके इलाके में नहीं आते थे। उनकी इस संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। 10 मई को मेरठ से 1857 की जनक्रांति की शुरूआत कोतवाल धन सिंह गुर्जर द्वारा हो चुकी थी। दरियाव सिंह और उनके नेतृत्व में ग्रामीण क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के छक्के छुड़ा दिए थे। दरियाव ने आसपास के ग्रामीणों को प्रेरित किया। दूसरी ओर दादरी रियासत के राजा उमराव सिंह गुर्जर ने भी आसपास के सभी गांवों के ग्रामीणों को एकत्रित कर लिया और 02 मई 1857 को सिकंदराबाद तहसील पर धावा बोल दिया था। वहां के हथियार और खजाना अपने अधिकार में कर लिया। इसकी सूचना मिलते ही बुलंदशहर के सिटी मजिस्ट्रेट सैनिक बल के साथ सिकंदराबाद पहुंच गया और दरियाव सिंह व उनकी सेना ने अंग्रेजों की काफी जनहानि की, लेकिन वह पकड़े गए। उनके सहित कई क्रांतिकारियों को बंदी बना लिया गया था। 14 मई 1857 को बुलंदशहर के कालाआम पर उन्हें फांसी पर लटका दिया गया था। दरियाव सिंह का जन्म दनकौर क्षेत्र के गांव जुनैदपुर में हुआ था।