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Ghaziabad News: शादी के 40 साल बाद भी टूट रहे बंधन

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आशुतोष यादव
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गाजियाबाद। पोते-पोतियों की शादी में आशीर्वाद देने के लिए हाथ उठने के बजाय अब बुजुर्गों के हाथ अदालत में तलाक के लिए उठ रहे हैं। हैरानी की बात बुजुर्ग दंपत्तियों को तलाक दिलाने में उनके बच्चे भी सहयोगी बन रहे हैं। कई बार की काउंसिलिंग और अदालत की सलाह के बाद भी बुजुर्ग दंपती एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर तलाक का मुकदमा लड़ने के लिए अदालत के चक्कर काट रहे हैं।
परिवार न्यायालय के मुकदमों की पैरवी करने वाली अधिवक्ता सिंधु प्रभा झा ने बताया कि कौशांबी निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग ने तलाक के साथ ही भरण पोषण का मुकदमा दाखिल किया है। बुजुर्ग को स्वयं चलने में परेशानी होती है। उनका बेटा पेशी पर लेकर आता है। सिंधु ने बताया कि पति की उम्र 70 वर्ष है। वह फिरोजाबाद में शिक्षक से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पत्नी का आरोप है कि पति ने सेवानिवृत्त होने के बाद दूसरी महिला को पूरी धनराशि दे दी। गुजारा करने के लिए बेटे पर निर्भर रहना पड़ता है, इसलिए तलाक और गुजारा भत्ता की अर्जी लगाई है।
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पूर्व बार अध्यक्ष योगेंद्र कौशिक ने बताया कि लोनी के टीला मोड़ निवासी 58 वर्षीय महिला की शादी 31 साल पहले साहिबाबाद क्षेत्र में रहने वाले बीएसएनएल कर्मी के साथ हुई थी। शादी के 25 साल बाद महिला और व्यक्ति में आए दिन तकरार होने लगी। महिला का आरोप था कि उनका पति पूरा वेतन दूसरी महिला के ऊपर खर्च कर देता है। विरोध करने पर मारपीट करता है। कई बार समझाने का प्रयास किया गया, इसके बावजूद आदत में सुधार नहीं हो रहा था। तकरार बढ़ने पर दोनों अलग रहने लगे। पत्नी ने अदालत में वाद दायर करते हुए गुजारा भत्ता की मांग की है। पत्नी का कहना है कि एक बेटी है, वह शादी के बाद ससुराल चली गई है। उसके भी दो बच्चे हैं, लेकिन पति से हक की लड़ाई के लिए अदालत के चक्कर काट रही हैं।

अधिवक्ता देवाशीष ने बताया कि गोविंदपुरम निवासी 56 वर्षीय महिला अधिवक्ता की शादी तीस वर्ष पहले आईटी सेक्टर में काम करने वाले व्यक्ति से हुई थी। कई बार लड़ाई झगड़े होने के बाद समझौता हुआ, लेकिन बात नहीं बनी तो विजय नगर निवासी 62 वर्षीय पति ने तलाक की अर्जी लगा दी। महिला दो बेटियों के साथ मायके में रह रही है। उन्होंने पति से खर्चा पाने के लिए अर्जी लगाई है, लेकिन पति से तलाक नहीं चाहती हैं।

संभाल सकते हैं बिगड़ते रिश्ते
वरिष्ठ साइकोलॉजिस्ट डॉ. संजीव त्यागी का कहना है कि इस उम्र में भविष्य को लेकर असुरक्षा हो जाती है। यह आपसी संबंध खराब होने पर अधिक समस्या होती है। शक करने की प्रवृत्ति स्कीजोफ्रीनिया बीमारी कहा जाता है। इसमें कोई तर्क नहीं होता है, इस कारण से विवाद बढ़ने लगता है। इलाज और काउंसिलिंग से बिगड़ते रिश्ते को संभाला जा सकता है।
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मुकदमा साबित होने पर अदालत करती है डिक्री
परिवार न्यायालय के पूर्व प्रधान न्यायाधीश शमशेर चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि तलाक सभ्य समाज का हिस्सा नहीं है। मगर, हैरानी होती है कि अब बुजुर्ग दंपति तक तलाक के लिए अर्जियां दाखिल कर रहे हैं। उम्मीद रहती है कि एक बार फिर से यह गिले शिकवे भूल एक-दूसरे का साथ जीवन भर निभाएंगे। अदालतों का पूरा प्रयास रहता है कि दंपती एक साथ होकर अदालत से जाएं, लेकिन एक दूसरे के खिलाफ मुकदमा साबित होने पर तलाक की डिक्री पारित की जाती है।


यह हैं तलाक के मुख्य कारण

बुजुर्गों में बच्चों को लेकर अनबन

एक-दूसरे के प्रति शक होना

पेंशन, संपत्ति को लेकर विवाद

पुरानी बातों को लेकर रिश्तों में कड़वाहट
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