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Ghaziabad News: चुनाव में भाजपा के क्षत्रिय नेताओं का भी होगा इम्तिहान

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गाजियाबाद। गाजियाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा के क्षत्रिय नेताओं को भी इस बार इम्तिहान से गुजरना होगा। इसकी दो वजह हैं। एक दो यहां क्षत्रिय मतदाता बड़ी संख्या में हैं, जबकि भाजपा ने वैश्य कार्ड चला है। दूसरा, पश्चिम उत्तर प्रदेश में जगह जगह क्षत्रिय समाज के लोग पंचायत कर रहे हैं। इसे देखते हुए भाजपा की ओर से क्षत्रियों को साधने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने संभाल रखी है। माना जा रहा है कि मतदान की तारीख नजदीक आने पर कई और क्षत्रिय नेताओं को उतारा जा सकता है।
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गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के तीन सांसद रहे हैं। इन्होंने कुल मिलाकर सात बार जीत हासिल की। इनमें रमेश चंद तोमर चार बार, वीके सिंह दो बार और राजनाथ सिंह एक बार जीते। वीके सिंह ने लगातार दो बार पांच लाख से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। इसके बावजूद इस बार वह चुनाव मैदान में नहीं है। इतना ही नहीं। मेरठ और सहारनपुर मंडल की आठ सीटों में से किसी पर भी भाजपा ने क्षत्रिय समाज से उम्मीदवार नहीं उतारा है।



ऐसे में क्षत्रिय समाज के मतदाताओं को साधने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। गाजियाबाद सीट से उम्मीदवार अतुल गर्ग के नामांकन में राजनाथ सिंह को भेजा गया। उन्होंने चुनावी जनसभा भी की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो बार आ चुके हैं। पहले प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में आए। इसके बाद पीएम मोदी के रोड शो में। रोड शो में वीके सिंह भी नजर आए लेकिन इसके बाद से गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र में सक्रिय नहीं है। चार बार सांसद रहे रमेश चंद तोमर भी भाजपा के मंचों पर नजर नहीं आ रहे।
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सतेंद्र सिसौदिया की बढ़ी जिम्मेदारी



भाजपा संगठन में पश्चिम उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सतेंद्र सिसौदिया हैं, जो क्षत्रिय समाज में आते हैं। इस चुनाव में उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में कई जगह समाज के लोग पंचायत कर चुके हैं। इन पंचायतों पर भाजपा की नजर हैं। पंचायतों के फैसलों को अन्य दल अपने हिसाब से पेश कर रहे हैं। ऐसे में देखना है कि सतेंद्र सिसौदिया इस चुनौती से कैसे निपटते हैं।
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