चुनाव चाहे विधान सभा का हो या लोकसभा का, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की खंडपीठ स्थापित किए जाने का मुद्दा जरूर उठता है। अधिवक्ताओं को 50 साल से ज्यादा हो गए हैं खंडपीठ के लिए आंदोलन करते हुए। समय-समय पर राजनैतिक दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिला है, लेकिन खंडपीठ नहीं मिल सकी है। इस बार भी चुनाव आते ही वकील जोर शोर से आवाज उठाने लगे हैं। देखना है कि जनता से जुड़े इस मुद्दे पर सुनवाई होती है या फिर हर बार की तरह मायूसी ही हाथ लगती है...
गाजियाबाद। गाजियाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश त्यागी कैली का कहना है कि बार पदाधिकारियों की बैठक बुलाकर सबकी सहमति से तय किया जाएगा कि लोकसभा चुनाव में मतदान के लिए क्या रणनीति बनाई जाए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति ने आंदोलन तेज कर दिया है। सभी दलों के नेताओं पर दबाव बनाया जाएगा।
आंदोलन के इतिहास के पन्ने पलटते हुए उन्होंने बताया कि खंडपीठ स्थापना की मांग 1967 से चली आ रही है। तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने कहा था, मैं यहां पर हां कर दूंगा, लेकिन मामला लखनऊ में फंस जाएगा। वह पेच आज तक फंसा हुआ है। पश्चिमी यूपी से प्रदेश और केंद्र की सरकार में कई मंत्री रहे लेकिन किसी ने खंडपीठ स्थापना के लिए ईमानदारी से प्रयास नहीं किया।
700 किमी तय करनी पड़ती है दूरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन 75 प्रतिशत मुकदमे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के हैं। यहां वादकारी को 700 किलोमीटर की दूर तय करनी पड़ती है। इस कारण सुलभ और सस्ता न्याय नहीं मिल पा रहा है। - सुनील त्यागी, पूर्व अध्यक्ष, गाजियाबाद बार एसोसिएशन
10 हजार रुपये हो जाते हैं खर्च
एक बार हाईकोर्ट जाने में मुवक्किल के कम से कम दस हजार रुपये खर्च होते हैं। आने जाने में दो दिन का समय और परेशानी अलग से होती है। अगर कोई अधिकारी मुकदमे में पेश होता है तो उसका खर्चा सरकारी कोष से जाता है, जबकि अधिवक्ता और मुवक्किल को स्वयं खर्च करना पड़ता है। - राजकुमार चौहान, अधिवक्ता
कई महीने तक चली हड़ताल
हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर कई बार लंबी हड़ताल चली है। इसमें जनता ही परेशान हुई। इस कारण से अब हड़ताल के लिए शनिवार का दिन तय कर दिया गया है। लोकसभा चुनाव में वोट मांगने वाले प्रत्याशियों के सामने यह मुद्दा रखा जाएगा। - विरेश त्यागी, पूर्व सहायक शासकीय अधिवक्ता
लखनऊ से जोड़ने की मांग
प्रत्याशियों के समक्ष मुद्दा उठाया जाएगा कि जब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना नहीं की जाती है, तब तक लखनऊ खंडपीठ में कार्य क्षेत्र संबद्ध कर दिया जाए। लखनऊ में जुड़ने से धन और समय दोनों की बचत होगी। - सुबोध त्यागी, अधिवक्ता
1967
से चल रहा है खंडपीठ के लिए आंदोलन
23
जिलों के अधिवक्ता जुड़े हैं आंदोलन से।
1.5 लाख
से ज्यादा मामले हैं उच्च न्यायालय में गाजियाबाद के।
700
किलोमीटर है प्रयागराज से गाजियाबाद की दूरी ट्रेन से।
प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित
तमाम मामलों में पैरवी के लिए पुलिस, प्रशासन और अन्य महकमो के अधिकारियों को उच्च न्यायालय जाना पड़ता है। इसमें दो से तीन दिन का समय लगता है। ऐसे में प्रशासनिक कार्य प्रभावित होता है। लोग दफ्तर के चक्कर काटते हैं लेकिन पैरवी में गया अधिकारी नहीं मिलता है।