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Ghaziabad News: निवेशकों के लिए जमीन का इंतजाम करेगा प्रशासन

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गाजियाबाद। लोनी के आलियाबाद, पचायरा और मीरपुर हिंदू की करीब 750 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होने के बावजूद यूपीसीडा (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) कब्जा नहीं ले पाया। इसकी वजह से औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हो पाए और निवेशकों को नए उद्योग लगाने में दिक्कत आ रही है। इस समस्या का समाधान अब जिला उद्योग केंद्र करेगा। इसके लिए अधिकारी ऐसे जमीन मालिकों की तलाश करेंगे जिनके पाए ऐसी जमीन हो जिनका भू-उपयोग मास्टर प्लान-2031 में औद्योगिक श्रेणी में हो। इसके लिए जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों ने जमीन मालिकों को आमंत्रित किया है, वहीं गांव-देहात में लोगों से संपर्क साधा जाएगा।
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जनवरी-2023 में गाजियाबाद में हुए निवेशक सम्मेलन के बाद से अब तक करीब 3649 लोगों ने एक लाख 13 हजार करोड़ रुपये निवेश करने के लिए एमओयू साइन किए हैं। इन 3649 में से करीब 80 फीसदी लोग ऐसे हैं जिन्हें अपना उद्योग या अन्य प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए 500 वर्गमीटर से लेकर एक हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। गाजियाबाद में जमीन के दाम ज्यादा हो जाने के कारण वह प्राइवेट जमीन नहीं खरीद पा रहे हैं। ऐसे में वह जिले में उद्योग लगाकर निवेश तो करना चाहते हैं, लेकिन सरकार की ओर से सस्ती जमीन चाहते हैं। दूसरी ओर, यूपीसीडा या जिला प्रशासन के लिए नए औद्योगिक क्षेत्र बसाने के लिए जमीन खरीदना आसान नहीं है।

जमीन अधिग्रहण से हाथ पीछे खींच रहा प्रशासन
भूमि अधिग्रहण एक्ट-2013 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में जमीन का अधिग्रहण करने के लिए किसानों को सर्किल रेट का चार गुना और शहरी क्षेत्र में दो गुना मुआवजा देना होगा। इसके बाद औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए सड़क, सीवर, बिजली, पार्क आदि सामुदायिक सुविधाएं विकसित करने पर अरबों की रकम खर्च करनी पड़ेगी। ऐसे में जमीन की कीमत करीब 30 से 40 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर पहुंच जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि उद्योगों के लिए इतनी मंहगी दरों पर जमीन नहीं बिक सकेगी।
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किसानों और निवेशकों को एक मंच पर लाने का प्रयास : उपायुक्त
उद्योगों के लिए जमीन मुहैया कराने के लिए यह अलग तरह का प्रयास शुरू किया गया है। जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त श्रीनाथ पासवान ने बताया कि जिन किसानों के पास ऐसी जमीन है जिनका भू-उपयोग औद्योगिक हो गया है, जिनके पास औद्योगिक क्षेत्रों में फ्री होल्ड जमीन है या जिनकी जमीन मास्टर प्लान के दायरे से बाहर है, उनसे संपर्क किया जा रहा है। ऐसे किसानों को आमंत्रित किया जा रहा है कि वह अपनी जमीन का ब्योरा जिला उद्योग केंद्र कार्यालय में दर्ज करा दें। ऐसी जमीनों का ब्योरा ऐसे निवेशकों को मुहैया करा दिया जाएगा जो अपने प्रोजेक्ट के लिए जमीन की तलाश कर रहे हैं। किसान और निवेशकों को एक मंच उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसके बाद दोनों पक्ष वार्ता करेंगे और जमीन खरीद-बेच सकेंगे।
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जमीन पर कब्जा मिलने के बाद शुरू कराया जाएगा डेवपलपमेंट
यूपीसीडा के उप महाप्रबंधक (सिविल) आरएस यादव का कहना है कि आलियाबाद, पचायरा और मीरपुर हिंदू की अधिग्रहीत जमीन में कुछ हिस्से पर विद्युत पोल लगा दिए गए हैं। इस दौरान किसानों ने विरोध कर दिया। उनका कहना है कि जमीन पर कब्जा मिलने के बाद सर्वे कराया जाएगा। इसके आधार पर सड़क, सीवर आदि सामुदायिक सुविधाओं के लिए जमीन चिह्नित कर विकास कराया जाएगा। कब्जा लेने का प्रयास किया जा रहा है।
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