गाजियाबाद। नेहरूनगर निवासी 27 वर्षीय आरुषी अग्रवाल ने गूगल की एक करोड़ की नौकरी को छोड़कर तीन सालों में 50 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी है। कॉलेजों में प्लेसमेंट नहीं पाने वाले और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं की राह आसान करने के लिए आरुषी ने कोडिंग सीखकर नया सॉफ्टवेयर तैयार किया। फिर 2020 कोरोना काल में एक लाख के निवेश से कंपनी टैलेंट डीक्रिप्ट शुरू की। तीन सालों में 10 लाख लोग उनके सॉफ्टवेयर की सेवाएं लेकर विश्व की नामी कंपनियों में मनचाही नौकरी हासिल कर चुके हैं।
भारत सहित अमेरिका, जर्मनी, सिंगापुर, यूएई, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, नेपाल सहित अन्य देशों की 380 कंपनियां उनकी कंपनी की सेवाएं ले रही हैं। विभिन्न कंपनियों की ओर से योग्य युवा शक्ति के चुनाव के लिए आरुषी ने टैलेंट डीक्रिप्ट नाम से प्लेटफार्म तैयार किया है। यहां आवेदन करने वाले युवाओं का हैकाथॉन के जरिए वर्चुअल स्किल टेस्ट लिया जाता है। स्किल टेस्ट पास करते हुए युवाओं को सीधे कंपनियों के साक्षात्कार में बैठने और योग्यता अनुसार मनचाहा पैकेज पाने में आसानी होती है। नामी कंपनियों के साथ आईआईटी जम्मू सहित कई विश्वविद्यालयों की ओर से उनकी कंपनी की सेवाएं ली जा रही हैं।
डेढ़ साल में तैयार किया सॉफ्टवेयर
मूलरूप से मुरादाबाद की रहने वाली आरुषी जेपी इंस्टीट्यूट से बीटेक और एमटेक के साथ आईआईटी दिल्ली से शोध इंटर्नशिप की। उन्हें गूगल कंपनी ने दो बार एक-एक करोड़ का पैकेज ऑफर किया। नौकरी के ऑफर को ठुकराते हुए 2018 में एमटेक के आखिरी साल में कोडिंग सीखकर सॉफ्टवेयर तैयार करना शुरू किया। कड़ी मेहनत से डेढ़ साल में सॉफ्टवेयर टैलेंट डीक्रिप्ट तैयार कर दिया। खास सॉफ्टवेयर में घर से ऑनलाइन स्किल टेस्ट देने के दौरान नकल, किसी अन्य डिवाइस का इस्तेमाल और दूसरे की सहायता लेना मुमकिन नहीं है। उन्होंने आईआईएम बंगलूरू से मैनेजमेंट का एक्जीक्यूटिव प्रोग्राम भी किया।
देश के टॉप-75 महिला आंत्रप्रेन्योर में शामिल
आरुषी की सफलता पर भारत सरकार के नीति आयोग की ओर से उन्हें देश की टॉप-75 महिला आंत्रप्रेन्योर में शामिल किया गया है। केंद्रीय आईटी मंत्रालय की ओर से उन्हें नवंबर 2022 और अप्रैल 2023 में उन्हें वुमेन आंत्रप्रेन्योर ऑफ द ईयर के पुरस्कार से नवाजा गया।
20 लोगों को दे रहीं रोजगार
आरुषी अपने दादा ओमप्रकाश गुप्ता को आदर्श मानती हैं। आईआईटी रुड़की से सिविल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री पाने वाले दादा से ही आरुषी ने पढ़ाई की। बाहर से कोई ट्यूशन नहीं लिया। पिता अजय गुप्ता चीनी के थोक व्यापारी और मां शिखा गुप्ता गृहणी हैं। आरुषी की नोएडा स्थित कंपनी में 20 कर्मचारी कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पैसा कमाना नहीं, बल्कि युवाओं को उनकी काबिलियत के अनुसार रोजगार दिलाने और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान करने का है।