कैसे पटरी पर आएंगीं औद्योगिक इकाइयां, बिन ट्रांसपोर्ट माल सप्लाई की बढ़ी परेशानी - घोषणा पत्र भरने के बाद भी उद्यमियों ने मजदूरों को कमी के कारण नहीं चलाईं इकाइयां - उद्यमी बोले ः औद्योगिक क्षेत्रों में बंद हो शराब के ठेके - उद्यमियों को कच्चे माल की कमी और माल सप्लाई न होने की सता रही चिंता
माई सिटी रिपोर्टर
साहिबाबाद। लॉकडाउन में औद्योगिक इकाइयों को नियम-शर्तों पर मंजूरी मिलने के बाद भी उद्यमियों की चिंता कम नहीं हुई हैं। मजदूरों की संख्या बेहद कम होने के बाद अब उद्यमियों को ट्रांसपोर्ट व्यवस्था ना मिलने से माल सप्लाई की चिंता सताने लगी है। वहीं, औद्योगिक क्षेत्रों में खुले शराब के ठेके भी उद्यमियों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। आनंद औद्योगिक क्षेत्र को छोड़कर साहिबाबाद और राजेंन्द्र नगर औद्योगिक क्षेत्र में ज्यादातर कंपनियां अभी तक संचालित नहीं हुईं हैं। पिछले कई दिनों की कशमश के बीच साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में अभी तक दस प्रतिशत ही कंपनियां संचालित हो सकी हैं। उनमें भी सिर्फ जरूरी सामान ही बनाया जा रहा है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों की चिंता है कि दिल्ली से कामगारों को कैसे उद्योग तक लाया जा सकता है। इसके अलावा जो श्रमिक कंपनियों में रुके हुए थे वो भी प्रशासन से ट्रांसपोर्ट मिलने के बाद अपने अपने घर चले गए। वहीं, कच्चा माल की आवाजाही और माल सप्लाई ना होने से उद्यमी चिंतित हैं। उन्होंने प्रशासन से ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को भी बहाल करने की मांग की है। जबकि कच्चे माल की खरीदारी के लिए बाजारों को विभिन्न तारीखों में खोलने की मंजूरी देने की मांग की है। इसके अलावा राजेंद्र नगर औद्योगिक क्षेत्र में 500 में से नौ या दस इकाइयां ही चलीं। उन्हें रोजाना सैनिटाइज कराने के बाद कर्मचारियों को मास्क बांटकर काम कराया जाता है। जबकि सभी को सोशल डिस्टेंसिंग में खड़े रहने की सख्त हिदायत दी जाती है। उधर, आनंद औद्योगिक क्षेत्र की एसोसिएशन का कहना है कि इलाके में 90 प्रतिशत कंपनियां चालू हो गई हैं। सभी ने घोषणा पत्र भर दिया था। फिलहाल उन्होंने भी ट्रांसपोर्ट सिस्टम को व्यवस्थित करने और औद्योगिक क्षेत्र से शराब के ठेकों को बंद करने की वकालत की। परिचर्चा ः - आनंद औद्योगिक क्षेत्र में अधिकांश कंपनियां चालू हो गई हैं। लेकिन सड़कों पर ट्रांसपोर्ट नहीं चल रहे हैं, माल आने और जाने में दिक्कत होगी। जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में शराब के ठेके खुलने से सोशल डिस्टेंस की पूरी व्यवस्था बिगड़ने से संंक्रमण फैल सकती है। प्रशासन से यही अपील है कि इस बारे में एक्शन लेकर संक्रमण फैलने से रोका जाए। राजू पांचाल, अध्यक्ष आनंद औद्योगिक क्षेत्र - कंपनियों चलाने के लिए श्रमिक नहीं हैं। जबकि कोई भी उत्पाद बनाने में पूरा प्रॉसेस होता है। यदि कोई भी श्रमिक मौजूद नहीं रहता है तो उसमें नुकसान होने का डर रहता है। जबकि उद्यमियों ने अपने अपने श्रमिकों को लॉकडाउन में अच्छे से रखा था। मगर अब श्रमिकों के गांव जाने से व्यवस्था बिगड़ गई। साइट-4 में जरूरी सामानों की कंपनियां ही चल रही हैं। अजीत तोमर, उपाध्यक्ष-साहिबाबाद असोसिएशन - कंपनियों में कच्चा माल तैयार करने के बाद उसे सप्लाई कहां करेंगे। उद्यमियों के लिए सबसे बड़ी चिंता है। यदि प्रशासन मार्केट खोलने के लिए एक-एक दिन तय कर दे तो उद्यमियों को राहत मिल सकती है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र में सिर्फ सात-आठ कंपनियां ही चल रही हैं। जबकि 500 इकाइयां इलाके में हैं। केके शर्मा, अध्यक्ष राजेंद्र औद्योगिक क्षेत्र - परमिशन लेने के बाद मैंने कंपनी चालू कर दी है। लेकिन श्रमिकों को कम बुलाया जिससे कि कंपनी में सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे। इससे पहले पूरी कंपनी को सैनिटाइज कराया। ट्रांसपोर्ट सिस्टम अगर खुल जाए तो माल सप्लाई होने में समस्या नहीं आएगी। मनोज गुप्ता- उद्यमी- साहिबाबाद - औद्योगिक क्षेत्र में सिर्फ सात या आठ उद्यमियों को परमिशन मिली है। जो कंपनियां संचालित कर रहे हैं। बाकी उद्यमी श्रमिकों की कमी के कारण काम शुरू नहीं कर पाए हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट सिस्टम को ठीक करना भी जरूरी है। क्यूंकि, कंपनियों में माल तैयार करने के लिए कच्चा माल आना बहुत जरूरी है। नरेंद्र बिष्ट- उद्यमी, राजेंद्र नगर ---------------------------------- सुमित कुमार