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Ghaziabad News: धमाके से उठा धुएं का गुबार, मलबे से आई मदद करो की पुकार

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लोनी। रूपनगर की पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके की गूंज 200 मीटर तक सुनाई दी। आसपास के मकान हिल गए। दो में दरार आ गई। धमाके के साथ ही फैक्टरी के ऊपर धुएं का गुबार बन गया। डर के मारे लोग घरों के बाहर निकले तो पहले यह गुबार ही नजर आया। इसके हटते ही भयावह मंजर दिखा जिससे लोग सहम गए । फैक्टरी मलबे में तब्दील हो चुकी थी। मलबे के अंदर से मदद करो, बचाओ की पुकार सुनाई दे रही थी।
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फैक्टरी में काम कर रहे बच्चे, महिला और युवक मलबे में दब गए थे। धमाके की आवाज सुनकर पड़ोस में रहने वाले उदित, सुरेंद्र, शिवा, संदीप समेत और कुछ लोग बाहर आए। फैक्टरी के दोनों ओर खाली प्लॉट हैं। इनमें भी मलबा भर गया था। मलबे में दबे लोग मदद की गुहार लगा रहे थे। स्थानीय लोगों ने लोगों को निकालना शुरू कर दिया। इस दौरान मेबिश, शाहिस्ता के परिजन और आसपास के लोग भी आ गए।सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची। वह भी लोगों को मलबे से निकालने में जुट गई। एक के बाद एक मलबे में दबे सात बच्चों, महिलाओं और युवकों को बाहर निकाला।
दो घंटे बाद निकाला गया इमरान, नहीं बची जान : लोगों का कहना था कि अभी और भी लोग मलबे में दबे हैं। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए फायर ब्रिगेड, नगर पालिका की टीम को बुलाया गया। करीब दो घंटे बाद मलबे में दबे इमरान को बाहर निकाला गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां कुछ देर बाद उपचार के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया। कुछ घायलों को लोग अपने ऑटो में डालकर अस्पताल ले गए।
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बारिश में एक घंटे रुका बचाव कार्य

बचाव कार्य के दौरान करीब एक बजे तेज बारिश के बीच इस कार्य को रोक दिया गया। बारिश के दौरान राहत कार्य थमा रहा इसके बाद बारिश बंद होने पर करीब सवा दो बजे दोबारा रेस्क्यू शुरू किया गया। इस बीच एनडीआरएफ और डॉग स्क्वाड की टीम को बुलाया गया। उन्होंने सर्च अभियान चलाया लेकिन कोई नहीं मिला।

फटा हुआ सिलिंडर और पटाखों के खोखे मिले

सभी घायलों को मलबे से निकालने के बाद पुलिस ने सर्च अभियान चलाया। पुलिस को मौके से एक फटा हुआ छोटा सिलिंडर मिला है। गनीमत रही कि यहां रखा बड़ा सिलिंडर नहीं फटा वरना हादसा और भी दर्दनाक हो सकता था। मौके से पुलिस टीम को पटाखों के खाली खोखे भी मौके से मिले हैं। पटाखों की गंध भी आ रही थी। आसपास के लोग भी यहां पटाखे बनाने की बात कह रहे थे। वहीं



ठेकेदार की तलाश
एसीपी रजनीश कुमार उपाध्याय ने बताया कि मौके से एक फटा हुआ सिलिंडर मिला है। कुछ पटाखों के खोल भी मिले हैं। जांच की जा रही है, कि घटना कैसे हुई। आसपास के लोग भी सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। ठेकेदार सारिक मौके से फरार हो गया है। पुलिस उसे तलाश रही हैं। सारिक के आने के बाद सही जानकारी मिलेगी।



लोनी के आसपास ठेके पर बन रहे पटाखे

संवाद न्यूज एजेंसी

साहिबाबाद। फर्रुखनगर में रोक के बाद पटाखे बनाने का कारोबार लोनी और आसपास के इलाकों में चोरी छिपे चल रहा है। टीलामोड़ निवासी राजू ने बताया कि पटाखे निर्माण और बिक्री पर एनजीटी की रोक से पहले कई दशकों तक फर्रुखनगर इलाके में पटाखे बनाने का काम होता था। पटाखे बनाने के काम की बारीकी जानने वालों का रोजगार प्रभावित हुआ। इस कारण कारीगर लोनी और आसपास के इलाकों में धीरे-धीरे पलायन कर गए। यह काम रूपनगर, गढ़ी, अशोक विहार, पसौंडा जैसी कच्ची कॉलोनियों में हो रहा है। यहां पर किराये के मकानों में ठेकेदार से जुड़कर चोरी छिपे काम किया जा रहा है।


पहले भी हुए हैं धमाके

- 05 जुलाई 2020 को मोदीनगर के पटाखा फैक्टरी में विस्फोट होने से सात लोगों की मौत व चार घायल हुए।

- 15 जून 2019 में गाजियाबाद में पटाखा फैक्टरी में विस्फोट से एक की मौत व एक घायल

-27 अक्तूबर 2018 को लोनी के गढ़ी में पटाखा गोदाम में लगी भीषण आग पर दस दमकल गाड़ियों ने काबू पाया।

- 28 अप्रैल 2017 में फर्रुखनगर में पटाखा फैक्टरी के गोदाम में विस्फोट से चार लोगों की मौत।

- 28 अक्तूबर 2016 को फर्रुखनगर में पटाखा फैक्टरी में आग लगने से एक की मौत व दो घायल

थोड़ी देर में ही खामोश हो गईं मलबे से आ रहीं चीखें

- मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला गया तो चेहरे, हाथ और कपड़े जले मिले

रिची कुमार
लोनी। धमाके के बाद चारों तरफ धुआं और धूल उड़ने लगी। आसपास के लोग अपने घरों से बाहर आए तो उन्हें कुछ नहीं दिखा। कुछ महिलाएं और बच्चों के चिल्लाने की आवाज आ रही थीं, जो कुछ देर में शांत हो गईं। मदद के लिए खड़े लोग समझ नहीं पा रहे थे कि कहां से आवाज आ रही हैं।
पड़ोस में रहने वाले सुरेंद्र ने देखा कि घर के पास एक मकान के मलबे के अंदर से कुछ आवाज आ रही हैं। वह अन्य लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। मलबे के अंदर से बच्चे और महिलाओं की रोने की आवाज आ रही थीं। अंदर से मदद की गुहार लगाई जा रही थी। बाहर से वह आवाज लगाने लगे कि हम आ गए हैं, तुम्हें बचा लेंगें। लोगों ने अपने हाथों से मलबे को हटाने लगे। करीब पांच मिनट तक चीख-पुकार मचती रही फिर चीख धीरे-धीरे शांत होने लगीं।

उन्होंने पहले दो बच्चों को बाहर निकाला, बच्चे बुरी तरह घायल हो चुके थे। एक-एक कर दो महिलाओं और चार बच्चों को बाहर निकाल लिया था। आसपास के लोग घायलों को लिटाने के लिए अपने घरों से खाट लाए। घायलों को खाट पर लिटाया गया। कुछ लोगों ने एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन कॉल नहीं लगी। गली में कुछ ऑटो चालक रहते थे। वह अपने ऑटो को लाए और पुलिस की मदद से घायलों को दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया। लोगों का कहना है कि जब महिलाओं को और बच्चों को बाहर निकाला तो उनकी सांसें चल रही थीं। वहीं दो घंटे बाद मलबे से निकाले गए इमरान अचेत थे।

लोगों ने दिखाई संवेदना

रूपनगर कॉलोनी में ज्यादातर लोग मजदूर हैं। जब यह घटना हुई, तो लोग मदद के लिए दौड़े। इस दौरान लोगों ने घटना को मोबाइल में कैद करने की बजाय लोगों को जल्द से जल्द बचाने को प्राथमिकता दी और अपनी संवेदना दिखाई। आसपास के लोग जल्द से जल्द सभी को सुरक्षित बाहर निकालना चाहते थे। मलबे से निकलने वाली महिलाओं के कपड़े जल गए थे। घायल महिलाओं को ढकने के लिए आसपास की अन्य महिलाओं कपड़े लाईं और उन पर डाले।

घटनास्थल पर पहुंचे विधायक

घटना के बाद लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि घटना दुखद है। पीड़ितों की मदद की जा रही है। पुलिस और प्रशासन के लोगों के साथ साथ आम लोगों ने भी घायलों को बचाने के लिए बहुत मेहनत की है।
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दर्दनाक हादसे का समय



सुबह करीब साढ़े बजे फैक्टरी में धमाका हुआ
10:31 मिनट पर दो मंजिला इमारत पूरी तरह गिर कर मलबे में तबदील हो गई
10:35 पर धुएं और धूल का गुब्बारा खत्म हुआ
10:36 पर लोगों ने खुद रेस्क्यू कर लोगों को निकालना शुरू किया

10:44 पर फरदीन को बाहर निकाला

10:50 पर दो महिलाओं को बाहर निकाला

11 बजे पुलिस को सूचना मिली

12 बजे तक सात महिलाओं और बच्चों को बाहर निकाला

2 बजे इमरान को मलबे से बाहर निकाला

2:10 पर एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची

2:30 बजे बचाव कार्य समाप्त हुआ
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