हस्तिनापुर के मखदूमपुर, परीक्षितगढ़ के खरखाली गांधी गंगा घाट और हापुड़ के गढ़-ब्रजघाट दीपों से जगमगाए
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ/हापुड़। अद्भुत, अकल्पनीय और भव्य... दीप मालिकाओं की सुनहरी आभा से दमकते घाटों का आकर्षण आंखों के रास्ते हृदय में उतरता चला गया। हस्तिनापुर के मखदूमपुर, परीक्षितगढ़ के खरखाली गांधी गंगा घाट और हापुड़ के गढ़-ब्रजघाट दीपों से जगमग हो गए। श्रद्धालुओं ने मेला क्षेत्र समेत ब्रजघाट और तिगरी में दीपदान की परंपरा का निर्वहन कर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए। मेरठ से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजन करने गए।
कार्तिक पूर्णिमा मेले का सबसे अहम पर्व दीपदान सोमवार को श्रद्धा व आस्थापूर्वक मनाया गया। कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्दशी की देर शाम पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व वाले गढ़ खादर मेले समेत गंगा की दूसरी तरफ जनपद अमरोहा के तिगरी धाम और गंगा नगरी ब्रजघाट में चल रहे शहरी मेले में पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने दीपदान की परंपरा निभाई। उप्र के साथ ही दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान समेत अन्य प्रदेशों व आसपास के जनपदों के श्रद्धालु शामिल रहे। जिन्होंने गत एक वर्ष में दिवंगत हुए अपने परिजनों और सगे संबंधियों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति की मन्नत मांगते हुए गंगा में दीपदान किया। वहीं सोमवार की दोपहर को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जिससे मेगा मार्ग पर दोपहर दो बजे से ही दो से ढाई किलोमीटर तक लंबा जाम लग गया। पुलिस प्रशासन द्वारा तैयार की गई वाहन पार्किंग का कोई लाभ नहीं दिखा।
अंधेरा होते ही बढ़ी मेले की रौनक
हस्तिनापुर। तंबुओं की नगरी में एक और हर-हर गंगे के जयकारे और दूसरी ओर रंगी बिरंगी लाइटों से रोशन मेला। शाम ढलते ही मेले की रौनक बढ़ गई। गंगा किनारे रेती में पड़ाव डालने वालों की संख्या बढ़ती जा रही थी। अस्थाई तंबुओं के बाहर महिलाएं परंपरागत चूल्हों पर रोटी सेकने के साथ ही दाल सब्जी बनाती नजर आईं। श्रद्धालु परिवारों के साथ दूरदराज क्षेत्रों से पहुंच रहे हैं।