गाजियाबाद। लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है, लेकिन चुनाव प्रचार में प्रयोग होने वाले झंडे, बैनर और पोस्टर का बाजार ठंडा पड़ा है। चुनाव प्रचार सामग्री तैयार करने वाले प्रकाशकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रचार का ट्रेंड बढ़ने से अब प्रचार सामग्री की मांग आधी रह गई है। दुकानदारों का कहना है कि जो ऑर्डर आ रहे हैं उनमें सिर्फ दो पार्टी के प्रत्याशी हैं। अभी तक अधिकांश प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार सामग्री की मांग भी नहीं की है।
सूचना क्रांति योजना, सस्ते मोबाइल फोन और सस्ता डाटा होने के कारण अधिकांश हाथों में मोबाइल फोन हैं। यह ऐसा माध्यम है, जिससे सीधे सूचनाओं को पहुंचाया जा सकता है। किस वर्ग को, किस समय और कौन सा संदेश भेजना है, यह भी आसान है। इसलिए परंपरागत माध्यमों की बजाय डिजिटल कैंपेनिंग की मांग बढ़ रही है।
भोपाल और विदिश से मिला है ऑर्डर
नवयुग मार्केट में चुनाव प्रचार सामग्रियों के विक्रेता ईशु गर्ग ने बताया कि अभी उनके पास एक राष्ट्रीय पार्टी के भोपाल और विदिशा से कुछ ऑर्डर मिले हैं। इसके अलावा गाजियाबाद से सिर्फ दो प्रत्याशियों अतुल गर्ग और डॉली शर्मा की तरफ से ऑर्डर मिला है। सीमित मात्रा में सिर्फ झंडे, टोपी और पटका तैयार करने को कहा है। उन्होंने बताया कि पिछले चुनावों के मुकाबले इस बार प्रचार सामग्रियों की खरीद-बिक्री 50 फीसदी घट गई है।
पहले लगती थी लाइन
नई बस्ती में फ्लैक्स और बोर्ड के कारोबारी दीप सागर का कहना है कि अभी प्रचार कई प्रत्याशियों ने शुरू ही नहीं किया है। उन्होंने बताया कि उनके पिता नरेंद्र वासुदेवा ने 50 वर्ष पहले काम शुरू किया था। उस दौरान किसी भी चुनाव में बोर्ड बनवाने और प्रचार सामग्री की मांग की लाइन लगी रहती थी। अब गिने-चुने प्रत्याशी ही सामग्री ले रहे हैं। इसमें सोशल मीडिया का भी बड़ा असर हो रहा है।
आयोग की सख्ती का भी बाजार पर असर
झंडे, बैनर-पोस्टर व अन्य पारंपरिक प्रचार सामग्रियों के विक्रेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग की सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है। पूरे दस्तावेज बिल-रसीद पास हों, तब भी जांच की सख्ती कम नहीं होती। इस वजह से प्रत्याशी बड़े पैमाने पर प्रचार सामग्री नहीं खरीद रहे। निर्वाचन खर्च बचाने के लिए अपने नाम के बजाय पार्टी के रंग से द्वार तोरण आदि बनवा रहे हैं, जिससे प्रचार भी हो जाए और प्रत्याशी के खाते में प्रचार का व्यय भी न जुड़े।
दुकान पर चुनाव सामाग्री के दाम
झंडे - 50 से 500 रुपये
बैनर - 50 से 400 रुपये
स्टीकर - 10 से 100 रुपये
ब्रेज - 30 रुपये से 50 रुपये
टोपी प्रिंट - 15 से 50 रुपये
पटका - 6 से 30 रुपये