साहिबाबाद। वसुंधरा योजना में विस्थापित किसानों के बच्चों की निजी स्कूलों में 50 फीसदी फीस माफी की योजना आवास विकास परिषद कार्यालय के फाइलों में अटक गई है। एक वर्ष पूर्व किसानों के बच्चों के लिए आवास विकास परिषद ने यह योजना तैयार की थी। इसके लिए फाइल भी तैयार हुई और स्कूलों की सूची भी बना ली गई, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ सकी।
आवास विकास परिषद ने वसुंधरा योजना में शिक्षण संस्थानों को सस्ते दर पर जमीन दी है। इसके बदले किसानों ने मांग की थी कि उनके बच्चों को स्कूलों में निशुल्क पढ़ाया जाए। आवास विकास परिषद की ओर से किसानों की 50 फीसदी कम फीस पर पढ़ाए जाने की बात मान ली गई। फरवरी 2022 में इस संबंध में किसान संघ और आवास आयुक्त की बैठक भी हुई। बैठक के बाद आयुक्त ने वसुंधरा आवास विकास परिषद कार्यालय से वसुंधरा में निजी स्कूलों की सूची मंगवाई। यह फाइल लखनऊ भेज दी गई लेकिन आज तक भी इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया। अग्रिम प्रक्रिया में सभी स्कूलों को आविप कार्यलय से पत्र जारी किया जाना था। किसान नेता बलराम सिंह का कहना है कि आज तक वह पत्र स्कूलों को नहीं भेजा गया, जिसकी वजह से बच्चों की फीस माफी तो दूर दाखिला भी नहीं मिल पाता है। बलराम सिंह कहते हैं कि सात गांव में सैकड़ों की संख्या में ऐसे बच्चे हैं जिनका दाखिला और फीस माफ होना था। वहीं, इस मामले में अधीक्षण अभियंता राकेश चंद्रा का कहना है कि इस संबंध में आवास आयुक्त लखनऊ स्तर से फैसला किया जाना था। अभी तक उनके पास इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश नहीं है।
इनसेट
इन गांव के करीब 300 किसान परिवार के बच्चों की होनी थी फीस माफ
कनावनी
अर्थला
कड़कड़ मॉडल
प्रहलादगढ़ी
झंडापुर
मकनपुर
साहिबाबाद गांव
इनसेट
आविप में बनाई जानी थी हेल्प डेस्क
इस प्रक्रिया में वसुंधरा आविप कार्यालय में एक हेल्प डेस्क बनाई जानी थी। यहां से विस्थापित किसानों की सूची विभाग में है। उनके बच्चों के फार्म को सत्यापित किया जाता, इसके आधार पर स्कूल में दाखिला मिलना था। नियमानुसार स्कूल बच्चों के दाखिले के लिए इन्कार भी नहीं कर सकता था और फीस माफ करना भी अनिवार्य था।